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REET एग्जाम: भजनलाल की गिरफ्तारी के बाद भी गुत्थी अनसुलझी, मुख्य अभियुक्त अभी भी पकड़ से दूर

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जयपुर। REET परीक्षा को लेकर मास्टर माइंड कहे जाने वाले भजनलाल की गिरफ्तारी के बाद भी गुत्थी अभी भी अनसुलझी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह आ खड़ा हुआ कि भजनलाल को ये पेपर लीक करने के लिए कसने उपलब्ध करवाया। जब भजनलाल ने 8 दिन पहले ही पेपर लीक की डील कर ली थी तो तय है कि उसके तार रीट परीक्षा करवाने वाली एजेंसी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति से जुड़े हुए थे। उस जिम्मेदार व्यक्ति का कहीं अता पता नहीं। उस व्यक्ति ने किसी अन्य से ऐसी ही डील की होगी तो उसका भी पता नहीं। ये पेपर अगर एक दिन पहले भजनलाल ने ही लीक किया तब भी पता नहीं कितने अभ्यर्थियों तक पहुंचा होगा। ये ऐसे अनसुलझे सवाल है जिसने रीट प्रकरण में राज्य की गहलोत सरकार को भी फिर से कटघरे में ला खड़ा कर दिया है।

एसओजी ने भजन लाल से पूछताछ के बाद जिन तथ्यों को उजागर किया है उसके अनुसार पेपर इंटरनेट बंद होने से 1 दिन पहले भेजा था। मास्टर माइंड भजनलाल ने JEN पृथ्वीलाल मीना से वॉट्सऐप कॉल के जरिए पहले ही 40 लाख रुपए में डील कर ली थी। इसके बाद एग्जाम से एक दिन पहले भजनलाल ने पेपर लीक कर दिया। भजनलाल पृथ्वीलाल को पहले से जानता था। वो पहले बाड़मेर में नौकरी कर चुका था और तभी से दोनों का एक-दूसरे से संपर्क था।

SOG ने भजनलाल को 27 जनवरी तक रिमांड पर ले रखा है। भजनलाल से पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। 8 दिन पहले डील होने के बाद पता चला कि एग्जाम के दिन इंटरनेट बंद हो सकता है। इस पर भजनलाल ने एक दिन पहले ही गंगापुर सिटी में वॉट्सऐप पर दोपहर में 3:45 बजे पेपर भेज दिया था। इसके बाद परीक्षा सेंटर में प्रिंटर से प्रिंट लेकर पेपर बांटे गए। इन सेंटर पर रीट के पेपर 8 से 10 लाख रुपए में बांट दिए गए।

-नेटबंदी से पहले ही पेपर पृथ्वीलाल मीना के पास पहुंच चुका था। पुलिस ने पृथ्वी, रवि मीना और रवि जीनापुर को आगरा से गिरफ्तार किया था। पृथ्वी ने पेपर बत्तीलाल को पहुंचाया।

-बत्तीलाल मीना के पास पेपर आने के बाद उसने 5 से 8 लाख रुपए में बेच दिए। एसओजी ने बत्तीलाल को उत्तराखंड से गिरफ्तार किया था। बत्तीलाल को जब पेपर मिला तो वह जयपुर में ही था। एसओजी को उसकी लोकेशन जयपुर में ही मिली थी।

-बत्तीलाल ने वॉट्सऐप पर पेपर आशीष को भेज दिया था। आशीष ने बहन ऊषा व मनीषा को नकल करने के लिए पेपर दे दिया। दिलखुश भी आशीष के पास था। इससे पेपर दिलखुश को भी मिल गया।

इंटरनेट बंद होने पर आशीष ने कॉन्स्टेबल देवेंद्र को गंगापुर सिटी में करौली फाटक के पास बुलाया था। आशीष के मोबाइल में पेपर की फोटो कांस्टेबल देवेंद्र ने ली थी। फिर हेड कॉन्स्टेबल यदुवीर को बता दिया। देवेंद्र के मोबाइल में पेपर के 33 फोटो मिले थे। वहां से देवेंद्र ने परिचित हेड कॉन्स्टेबल पुष्पेंद्र के सरकारी क्वार्टर में जाकर पत्नी को पेपर और आंसर बता दिए। आशीष ने गाड़ी में बैठकर दोनों बहनों को पेपर व आंसर बताए थे।

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