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नेट-थियेट पर महफिल-ए-सुकून का आयोजन : “देखते जाइये कैसे हैं जमाने वाले, तापने बैठ गये आग लगाने वाले” ग़ज़ल खूब जमीं

नेट-थियेट

जयपुर। नेट-थियेट कार्यक्रमों की 81वीं श्रंखला में राज्य के सुप्रसिद्ध गायक मुन्नालाल भाट ने पारसा जयपुरी की ग़ज़ल चैन मिल जायेगा ज़माने को, फेंक दूंगा जब आशियाने को अपनी पुकशिश आवाज़ में सुनाया तो श्रोता एक अलग दुनियां में खो गये। वैसे मुन्नालाल राजस्थानी गीतों, भजन एव नग़माकार के रूप में अपनी पहचान रखतें हैं। नेट-थियेट के राजेन्द्र शर्मा राजू ने बताया कि कलाकार मुन्नालाल ने साहिर भोपाली की लिखी ग़ज़ल ज़िन्दा हॅूं अभी साथ तेरा छूटनें के बाद, दिल तो दिल बन गया है मगर टूटने के बाद सुनाई तो ऑनलाइन दर्शक मन्त्रमुग्ध हो गये।

इसके बाद शायर नसीम रिफ़त की ग़ज़ल देखते जाइये कैसे हैं जमाने वाले तापने बैठ गये आग लगाने वाले और अंत में ग़ज़ल बाख़ुदा अब तो मुझे कोई तमन्ना ही नही, फिर ये क्या बात है ये दिल कहीं लगता ही नही शायर शमीम जयपुरी की गजल गाकर माहौल को खुशनुमा बना दिया। कार्यक्रम में पण्डित हरिहर शरण भट्ट ने सितार पर अपनी सधी हुई उंगलियों से तारों को ऐसा झंकृत किया कि महफिल की रौनक बढी, जयपुर के युवा तबला वादक मुज्फफर रहमान की उंगलियों की तिरकिट और गिटार पर गौरव भट्ट की असरदार संगत ने महफिल-ए-सुकून कार्यक्रम को परवान चढाया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ मीडियाकर्मी रमेश पुरोहित ने किया। संगीत विष्णु कुमार जांगिड़, प्रकाश मनोज स्वामी व दृश्य सज्जा अंकित शर्मा नोनू, सौरभ कुमावत और अर्जुन का रहा।

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