जयपुर : राजस्थान विधानसभा का 9 सितम्बर से शुरू होने वाला मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने कि सम्भावना है। सरकार के खिलाफ विभिन्न मुद्दों पर होने वाले हंगामे के साथ इस सत्र को लेकर भी विवाद बना हुआ है। विधानसभा का सत्रावसान किए बिना सत्र बुलाने को प्रतिपक्ष विधानसभा सदस्यों का विशेषाधिकार हनन बता रही है तो सत्ता पक्ष यह दलील दे रहा है कि सत्र के दौरान सरकार विभिन्न मुद्दों पर चर्चा को तैयार है। सबसे बड़ा झगड़ा तो प्रश्नकाल को लेकर बना हुआ है। क्योकि एक सत्र में विधायक 100 से अधिक प्रश्न नहीं पूछ सकते है। सत्रावसान हो जाता तो सभी को प्रश्न पूछने का मौका मिलता लेकिन 200 में से 24 विधायक ऐसे है जो 100 प्रश्न पूछ चुके है, इन 24 विधायकों को लेकर ही पक्ष-विपक्ष में बड़ा टकराव हो सकता है। भाजपा यह मामला कार्य सलाहकार समिति (बीएसी) की नौ सितंबर को होने वाली बैठक में उठाएगी।
नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि विधानसभाध्यक्ष सीपी जोशी से भी इस मसले पर बात की और उनसे आग्रह किया गया है कि अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए विधायकों को उनके अधिकार वापस दिलवाएं। कटारिया ने इसे विधायकों के अधिकारों का हनन बताया है। वहीं, सरकारी मुख्य सचेतक महेश जोशी ने कहा, शायद BJP नेताओं को नियम, प्रक्रिया और कानून की जानकारी नहीं है। आरोप लगाने के बजाए BJP के नेता ये बताएं कि किन नियमो, प्रक्रिया और कानूनों का उल्लंघन हुआ है। मैं दावे से कहता हूँ कि सदन में किसी भी नियम, प्रक्रिया और कानून का उल्लंघन नहीं हुआ। सदन चलाने में सहयोग करने की विपक्ष की भी जिम्मेदारी होती है। महेश जोशी ने कहा कि मैं विपक्ष से अपील करना चाहूंगा कि सदन चलाने में विधानसभा अध्यक्ष और सत्ता पक्ष का सहयोग करें।
