जयपुर: राजस्थान हाईकोर्ट ने दोहराया है कि दो बालिगों के बीच संबंध को अनैतिक और असमाजिक कहे जाने बावजूद, अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता को संरक्षित किया जाना चाहिए ।
जस्टिस सतीश कुमार शर्मा की बैंच ने कहा कि राजस्थान पुलिस एक्ट, 2007 की धारा 29 के तहत राज्य के प्रत्येक पुलिस अधिकारी का कर्तव्य है कि वह नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। बेंच ने कहा, “… भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार, व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा की जानी चाहिए, इस तथ्य के बावजूद कि दो बालिगों के बीच के संबंध को अनैतिक और असामाजिक कहा जा सकता है।”
राजस्थान पुलिस अधिनियम, 2007 की धारा 29 के अनुसार प्रत्येक पुलिस अधिकारी नागरिकों के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करने के लिए बाध्य है।” कोर्ट ने यह टिप्पणी अजय कुमार बेरवा और समरीन नामक दंपति की याचिका की सुनवाई के दौरान की है।
दोनो याचिकाकर्ता लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं और पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। लता सिंह बनाम यूपी सरकार और एस खुशबू बनाम कन्नियाम्मल सहित विषय पर ऐतिहासिक निर्णयों पर भरोसा करते हुए बैंच ने कहा है। याचिकाकर्ताओं द्वारा लगाए गए आरोपों की वास्तविकता या सत्यता पर कोई राय व्यक्त किए बिना, इस याचिका का निपटारा इस निर्देश के साथ किया है। याचिकाकर्ताओं के वकील याचिका की एक प्रति, इसके अनुलग्नक के साथ ई-मेल के माध्यम से संबंधित पुलिस थाने के एसएचओ को भेजें और इसकी प्राप्ति पर, संबंधित एचएचओ इसे एक शिकायत के रूप में मानेंगे और उचित जांच के बाद, वह कानून के अनुसार याचिकाकर्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाएं।
