जयपुर। पायलट के बयान के बाद उनके कैंप के कांग्रेस विधायक वेदप्रकाश सोलंकी ने गहलोत सरकार पर बड़ा हमला बेाला है। वे बोले, इस सरकार में अब तक कांग्रेस के लिए लाठियां खाने वालों की सुनवाई नहीं हुई है। कांग्रेस पार्टी को जो दलित, आदिवासी, पिछड़े और माइनोरिटी के लोग वोट देते हैं, उन्हें हम बदले में क्या दे रहे हैं। केवल वोट के वक्त ये वर्ग याद आते हैं। जहां एससी, एसटी, माइनॉरिटी के वोट नहीं हैं, वहां से कांग्रेस नेता चुनाव लड़कर देख लें, पता लग जाएगा। वोट हमारा, दूसरे लोग मलाई खा रहे हैं यह नहीं चलेगा।
सोलंकी ने आज प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के घर पर ही मीडिया के सामने सरकार पर आग उगली। डोटासरा का स्टॉफ व वहां मौजूद अन्य नेता दुबके हुए सुनते रहे। सोलंकी ने कहा,पायलट साब तो शुरू से ही कह रहे हैं। 10 महीने से कोई दलित कैबिनेट में नहीं है, हम किसके सामने अपना दुखड़ा रोएं। अगर नया मंत्री नहीं बनाना तो किसी राज्य मंत्री को ही कैबिनेट मंत्री बना दीजिए।

लाठियां खाने वाले बैठे हैं, रिटायर्ड अफसर नियुक्तयां पा गए
पायलट समर्थक विधायक वेद सोलंकी यहीं नहीं रूके और अपनी बात को दोहराते हुए कहा कि मुझे दर्द है कि जिन कार्यकर्ताओं ने बरसों से कांग्रेस को मजबूत करने का काम किया, उन्हें कुछ नहीं मिला। आईएएस और बड़े-बड़े पदों पर रहे रिटायर्ड अफसरों को राजनीतिक नियुक्तियां दे दीं। जिस कार्यकर्ता ने कांग्रेस के लिए लाठियां खाईं, खून-पसीना बहाया, वह देखता रह गया। कार्यकर्ता कह रहा है कि हमने लाठियां खाई है, लाठी खाने वाले कार्यकर्ता का नंबर कब आएगा।
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दलित, आदिवासी और माइनॉरिटी वोट के समय याद आते हैं
उन्होंनेे कहा- सोनिया गांधी के निर्देश पर प्रियंका गांधी, वेणुगोपाल और दिवंगत अहमद पटेल ने हमारी मांगों को सुना था। हमने उनके सामने हमारे मुद्दे रखे थे। उन्होंने मुद्दों के समाधान का वादा किया था। आज आप देख लो इस सरकार में एससी, एसटी और अल्पसंख्यक की सत्ता में भागीदारी नहीं है। जब वोट लेने की बात आती है तो कांग्रेस को दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक याद आते हैं, लेकिन इन वर्गों को जितनी भागीदारी और जितना अधिकार मिलना चाहिए था, वह इस सरकार में नहीं मिला है।
एससी-एसटी विरोधी फैसलों में गर्ग का हाथ
वेद प्रकाश ने आज फिर चिकित्सा राज्यमंत्री सुभाष गर्ग को घेरते हुए कहा कि पहली बार के विधायक मंत्री सुभाष गर्ग नौ कमेटियों में हैं और दो से तीन बार जीत चुके टीकाराम जूली और भजनलाल जाटव जैसे मंत्री बाहर हैं। क्या सुभाष गर्ग ही अकेले पूरे राजस्थान की राजनीति को समझते हैं? इस सरकार में एससी, एसटी समुदाय के खिलाफ जितने फैसले हुए हैं, उनमें सुभाष गर्ग मिले हुए हैं। चाहे अंबेडकर पीठ का मामला हो या एससी-एसटी के बैकलॉग का मामला हो, मुख्यमंत्री से गलत फैसले करवाने में मंत्री गर्ग का ही हाथ रहा है।
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