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वसुंधरा राजे का 13 नं. का बंगला रहेगा बरकरार, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Vasundhara Raje's 13 No. The bungalow will remain intact, the High Court dismissed the petition

जयपुर: राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। राजे को राज्य सरकार की ओर से बंगला देने से जुड़ी याचिका को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। राजस्थान सरकार ने वसुंधरा राजे के पक्ष में उतरते हुए उन्हें बंगले के अलॉटमेंट का हकदार बताया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने पक्षकार बनाए चीफ सेक्रेट्री को भी कंटेम्प्ट से मुक्त कर दिया है। दरअसल, वसुंधरा राजे से 4 सितंबर 2019 से 1 अगस्त 2020 तक बंगले में रहने के लिए प्रतिदिन 10 हजार रुपए हर्जाना वसूलने की मांग की गई थी,जो उन्हें नहीं देना पड़ेगा।

जस्टिस पंकज भंडारी और जस्टिस अनूप ढंड की डिवीजनल बेंच ने यह आदेश मिलापचन्द डांडिया की कंटेम्प्ट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में जानबूझकर यानी विलफुल कंटेम्प्ट नहीं हुआ है। कोर्ट ने 8 मार्च को सुनवाई पूरी करते हुए याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था।

याचिकाकर्ता के वकील एडवोकेट विमल चौधरी ने बताया कि हाईकोर्ट डिवीजनल बेंच ने ऑर्डर में कहा- हाईकोर्ट की ओर से पिछले ऑर्डर में पूर्व मुख्यमंत्री का बंगला खाली करवाने का कोई निर्देश नहीं था। मिलापचन्द डांडिया का जजमेंट तो मंजूर हो गया था। कोर्ट ने पिछले आदेश में नोटिफिकेशन को भी क्वेश कर दिया। यह डायरेक्शन नहीं दिए कि वसुंधरा राजे बंगला खाली करें और उनसे पैनल्टी वसूल करें। इसलिए यह न्यायालय की अवमानना नहीं है।

राजस्थान सरकार ने कहा- वरिष्ठ विधायक होने के नाते दिया बंगला
राजस्थान सरकार की ओर से कोर्ट में कहा गया कि वसुंधरा राजे को वरिष्ठ विधायक होने के नाते आवास दिया गया है। इसमें कोर्ट के आदेश की अवमानना नहीं हुई है। तत्कालीन मुख्य सचिव ने भी वसुंधरा राजे को बंगले के लिए योग्य बताया था। मुख्य सचिव की ओर से कोर्ट में पेश शपथ पत्र में कहा गया कि हाईकोर्ट के आदेश के पालन में राजस्थान मंत्री वेतनमान अधिनियम, 2017 के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों को दी गई सुविधाएं वापस ली जा चुकी हैं। 1 अगस्त 2020 को राजस्थान विधानसभा सदस्यों को निवासीय सुविधा नियम,1973 में संशोधन किया गया है। उसी के प्रोविजन के मुताबिक वसुंधरा राजे को बंगला आंवटित किया गया है।

यह है पूरा मामला
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को जयपुर में आवंटित 13 सिविल लाइंस बंगले को लेकर मिलाप चंद डांडिया की ओर से अवमानना याचिका लगाई गई थी। इसमें कहा गया कि 4 सितंबर, 2019 को कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाएं देने के संबंध में किए गए प्रावधानों को रद्द कर दिया था। ऐसे में वसुंधरा राजे को सुविधा देना गलत है। इसके बाद अशोक गहलोत सरकार ने सितम्बर 2020 में राजस्थान हाईकोर्ट में अतिरिक्त शपथ-पेश किया। गहलोत सरकार ने बंगले और अन्य सुविधाओं को लेकर हाईकोर्ट में कहा कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाएं देने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है। शपथ पत्र में सरकार ने साफ किया कि वसुंधरा राजे को वरिष्ठ विधायक होने के नाते बंगला दिया गया है। तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव स्वरूप की ओर से कोर्ट में पेश किए गए अतिरिक्त शपथ पत्र को लेकर यह आग्रह किया गया कि नए तथ्यों को हाईकोर्ट रिकॉर्ड में शामिल करें, जिससे अवमानना याचिका में कार्रवाई को खत्म किया जा सके।

 

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