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नेट-थियेट पर सेक्सोफोन का सुरीला वादन, उस्ताद रसीद खां ने रची सुरों की क़ायनात

जयपुर। नेट-थियेट रंगमंच के कार्यक्रम की श्रृंखला में जयपुर के जाने-माने सेक्सोफोनिस्ट उस्ताद रसीद खां ने जब सेक्सोफोन से सुरों की ऐसी जाजम बिदाई की ऑनलाइन बैठे दर्शक मन्त्रमुग्ध हो उठे। उस्ताद रसीद खां ने जहॉ शास्त्रीय अंग से रूबरू करवाया वहीं इस अनूठे वाद्य की प्रकृति के अनुरूप इसपर बजाये गये सदाबहार चर्चित गानो की प्रस्तुति दी। सेक्सोफोन पर ग़ज़ल और गीत के नग़्में छेडे़ तो मौसम की फिज़ाएं बदली। उन्होनें राग कौशिक धनी पर आधारित याद पिया की आये, ये दुःख सहा ना जाये से कार्यक्रम की शुरूआत की।

नेट-थियेट के राजेन्द्र शर्मा राजू ने बताया कि सेक्सोफोन की सुरीली धुन पर जब उन्हौने गुलाम अली की ग़ज़ल शाम से दिल उदास है आजा के साथ करूना याद मगर, किस तरह भूलाउं इसे सुनाई इसके बाद उन्होनें अगर मुझसे मोहब्बत है मुझे सब अपने ग़म दे दो की मघुर धुन से मन मोह लिया। इसके पश्चात उन्होने कई नामी गीत ग़ज़लें अपने साज सेक्सोफोन के माध्यम दर्शकों को सुनाई रसीद खां के साथ सिन्थेसाइजर पर रहबर हुसैन की उंगलियों का ऐसा जादु चला कि दर्शक वाह-वाह करने लगे। तबले पर पण्डित महेन्द्र शंकर डांगी सधी हुयी संगत से मन मोह लिया। संचालन राहुल गौतम ने किया।

संगीत विष्णु कुमार जांगिड, प्रकाश मनोज स्वामी, जितेन्द्र शर्मा,, अंकित जांगिड व सेट अर्जुन देव, सौरभ कुमावत, अजय शर्मा, जिवितेश शर्मा, अंकित शर्मा नोनू, धृति शर्मा कृष्ण-पुजा और रोहित रहे।

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