जयपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार को जोरदार झटका दिया। हाईकोर्ट ने नागौर के ताऊसर में बंजारा बस्ती प्रकरण में आरोपी बनाए गए आरएलपी के दो विधायकों के खिलाफ अभियोजन मंजूरी वापस लेने के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही, नागौर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट को इस मामले में नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। अब आरएलपी के विधायक पुखराज गर्ग व इंद्रा बावरी पर गिरफ्तारी की तलवार लटक गई है।
बंजारा बस्ती प्रकरण में राज्य सरकार ने इस वर्ष 20 फरवरी को एक आदेश निकाल दोनों विधायक पुखराज गर्ग और इंद्रा बावरी के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति को विड्रॉ (वापस ले लिया) कर लिया था। इस मामले में एक आरोपी देवाराम की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह मामला सामने आया। इस पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार के विशिष्ट शासन सचिव (गृह) व एएजी फरजंद अली से शपथ पत्र प्रस्तुत करने को कहा था। हाईकोर्ट ने इन दोनों से पूछा था कि किन परिस्थितियों में राज्य सरकार ने दोनों विधायकों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति को विड्रॉ किया है। इस बीच, घटनाक्रम तेजी से घूमा और राज्य सरकार ने इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए एएजी फरजंद अली के स्थान पर किसी अन्य अतिरिक्त महाधिवक्ता को जिम्मेदारी सौंप दी। इससे खफा होकर फरजंद अली ने अतिरिक्त महाधिवक्ता का पद त्याग दिया और शुक्रवार को कोर्ट में उपस्थित रहने में असमर्थता जता दी।
इसे लेकर न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी ने भी नाराजगी जताई। विशिष्ट शासन सचिव (गृह) वी सरवन कुमार के आग्रह पर फरजंद अली उनके साथ कोर्ट में पेश हुए और पक्ष रखा। उन्होंने कोर्ट को बताया कि बंजारा बस्ती में लोग एकत्र हो गए। इस बीच, एक बोलेरो से टकरा जाने के कारण एक व्यक्ति की मौत भी हो गई। जनप्रतिनिधि होने के नाते दोनों विधायक पुखराज गर्ग व इंद्रा बावरी भी मौके पर मौजूद थे। इस कारण राज्य सरकार ने इन दोनों के खिलाफ अभियोजन पर रोक लगाई थी। न्यायाधीश भाटी ने दोनों पक्ष को सुनने के बाद राज्य सरकार के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट के इस आदेश के बाद दोनों के खिलाफ अन्य आरोपियों के साथ ही मुकदमा चलेगा। इस मामले में चार्जशीट पेश की जा चुकी है।
