जयपुर : राज्यपाल कलराज मिश्र ने एडवोकेट वेलफेयर अमेंडमेंट बिल में बदलाव करने के लिए सरकार को बिल वापस भेज दिया है। उन्होंने बार काउंसिल और वकीलों के संगठन के विरोध का हवाला दिया है। राज्यपाल मिश्र ने वकील संगठनों से मिले ज्ञापनों और उनकी मांग के आधार पर राज्य सरकार को इसके प्रावधानों में बदलाव करने का सुझाव दिया है। राज्यपाल के बिल वापस लौटाने की सूचना विधानसभा में दी गई। स्पीकर सीपी जोशी ने बिल वापस लौटाने के साथ राज्यपाल का मैसेज भी पढ़कर सुनाया, जिसमें राज्यपाल ने क्या बदलावों का सुझाव दिया है।
पिछले साल पारित हुआ था विधानसभा में बिल
बता दे कि विधानसभा में एडवोकेट वेलफेयर फंड अमेंडमेंट बिल पिछले साल पारित हुआ था। 24 मार्च 2020 को मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेजा गया। इस बिल में एडवोकेट वेलफेयर फंड में वकीलों से लिए जाने वाले पैसे को बढ़ाया गया था। लाइफटाइम मेंबरशिप को 17500 से बढ़ाकर 1 लाख किया गया था। वकालतनामे पर लगने वाली टिकट का पैसा बढ़ाकर जिला कोर्ट में 100 रुपए और हाईकोर्ट के लिए 200 रुपए करने का प्रावधान किया गया था। लाइफटाइम मेंबरशिप और वकालतनामे की टिकट का पैसा बढ़ाने पर वकील विरोध कर रहे थे। वकीलों ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर इन दोनों प्रावधानों को वापस लेने की मांग की थी।
नए वकील नहीं दे सकते एक लाख
वकीलों को मेडिकल सुविधाओं और रिटायरमेंट पर मिलने वाली रकम के लिए एडवोकेट वेलफेयर फंड बना हुआ है। इसके लिए इस फंड में वकीलों से पैसा लिया जाता है। एडवोकेट वेलफेयर फंड में लाइफटाइम मेंबरशिप और वकालतनामे पर लगने वाली टिकट के पैसे बढ़ाने पर वकीलों के विरोध के बाद अब इस बिल में संशोधन तय माना जा रहा है। अब सरकार इसमें संशोधन करने की तैयारी में है।
संशोधन के साथ आएगा एडवोकेट वेलफेयर अमेंडमेंट बिल
बार काउंसिल ऑफ राजस्थान सहित वकीलों के कई संगठनों की मांग के बाद लाइफटाइम मेंबरशिप को 1 लाख से घटाकर 50 हजार करने और वकालतनामे पर लगने वाली टिकट पर जिला अदालतों और हाईकोर्ट में एक समान 100 रुपए करने पर सहमति बन चुकी है। वकीलों के संगठन इस मामले में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्यपाल कलराज मिश्र से मिले थे। राज्यपाल के बिल लौटाने के बाद इसे अब सरकार के पास भेजा जाएगा। सरकार संशोधन के साथ बिल लाएगी।
