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ढूंढ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए उद्गम स्थल पर सघन वृक्षारोपण अभियान शुरू

जयपुर। ढूंढाड़ प्रदेश की पहचान रही ढूंढ नदी को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से सीकर रोड न्यू ट्रांसपोर्ट नगर के पास ढूंढ नदी के उद्गम स्थल पर रविवार को सघन वृक्षारोपण किया गया। गायत्री परिवार के पर्यावरण आंदोलन के अंतर्गत  कार्यकर्ताओं ने सुबह से शाम तक ढूंढ नदी के उद्गम स्थल पर  बरगद और पीपल के 8 से 10 फीट लंबे पौधे लगाने के अभियान का श्री गणेश किया। रविवार को कुछ पौधे पहाड़ी पर भी लगाए गए। यह विशेष पौधे लखनऊ की नर्सरी से मंगवाए गए। पौधों की सुरक्षा के लिए मौके पर ही ट्री गार्ड बनाकर लगाए गए।

गायत्री परिवार के पर्यावरण संरक्षण आंदोलन के राजस्थान प्रदेश प्रभारी विष्णु गुप्ता ने बताया कि प्रारंभ में पौधों का तिलक-कलावा से पूजन किया गया तथा गायत्री मंत्रोच्चार के साथ पौधरोपण किया गया। पर्यावरण संरक्षण आंदोलन प्रभारी भैरू लाल जाट ने बताया कि पूरे मानसून सत्र में यहां सघन वृक्षारोपण किया जाएगा। इस अवसर पर गायत्री परिवार जयपुर के समन्वयक ओम प्रकाश अग्रवाल गायत्री शक्तिपीठ ब्रह्मपुरी के व्यवस्थापक रणवीर सिंह चौधरी, उदयपुरिया के सरपंच राजकुमार खोवाल सहित वन विभाग के कर्मचारी एवं ग्रामीण उपस्थित रहे।

ढूंढ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए उद्गम स्थल पर सघन पौधारोपण अभियान शुरू

उल्लेखनीय है कि प्रदेश की सबसे प्राचीन नदियों में ढूंढ़ नदी का उद्गम स्थल खेरवाड़ी गांव के पास न्यू ट्रांसपोर्ट नगर के नजदीक है। जंगल में गायत्री परिवार वर्षाकाल में यहां सघन वन विकसित करने में जुटा हुआ है।। बड़ी संख्या में पीपल और बरगद के पेड़ लगाए जा रहे हैं। गायत्री परिवार,जयपुर के समन्वयक ओमप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए लुप्त हो चुकी नदियों का पुनर्जीवित होना भी सहायक है।

ढूंढ नदी को पुनर्जीवित करने के लिए उद्गम स्थल पर सघन पौधारोपण अभियान शुरू

भैरू खेजड़ा के पास भूरी डूंगरी हरमाड़ा के आगे दौलतपुरा, नया ट्रांसपोर्ट नगर के पास ढूंढ नदी का उद्गम स्थल है। इसी कारण जयपुर कभी ढूंढ़ाड़ प्रदेश कहलाता था। इसकी भाषा को आज भी ढूंढ़ाड़ी भाषा कहा जाता है।  यह सब ढूंढ़ नदी के किनारे बसे होने के कारण होता था। ढूंढ़ नदी राजस्थान की प्राचीन नदियों में एक थी, जो रियासतकाल में ही लुप्त हो गई। मगर नदी का बहाव क्षेत्र, मार्ग आज भी  सुरक्षित है। अगर सभी लोग और संस्थाएं मिल जुल कर यहां सघन वृक्षारोपण करेंगी तो आने वाले कुछ ही सालों में यह नदी बहने लगेगी।

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