देवस्थान विभाग के श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ में रास लीला, कंस उद्धार, उद्धव प्रसंग और रुक्मणी विवाह के प्रसंग

-भगवान श्रीकृष्ण की रासलीला ही काम पर विजय का मार्ग

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देवस्थान विभाग के श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ में रास लीला, कंस उद्धार, उद्धव प्रसंग और रुक्मणी विवाह के प्रसंग

जयपुर। देवस्थान विभाग द्वारा आमेर रोड़ जल महल के सामने स्थित श्री बलदेव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में रविवार को भगवान श्री कृष्ण की रासलीला, उद्धव का ज्ञान मार्ग, मथुरा गमन, कंस उद्धार और रुक्मणी विवाह के भावपूर्ण प्रवचनों से श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए श्री अकिंचन जी महाराज ने भक्तिरस से परिपूर्ण प्रवचन में श्री कृष्ण लीला के गूढ रहस्यों से साक्षात् कराया।

श्री अकिंचन जी महाराज ने श्री मुख से भगवान की रासलीला को काम पर विजय का मार्ग बताया और कहा कि बड़े बड़े ऋषी मुनि तपस्या के बल पर भी काम पर विजय में सफल नहीं हो पाएं वहीं रासलीला के माध्यम से भगवान श्री कृष्ण ने कामादि भोगों पर विजय की राह प्रशस्त की है। श्री मद्भागवत कथा सप्ताह का आयोजन देवस्थान विभाग द्वारा स्व. श्री जय दयाल शर्मा मेमोरियल एण्ड चेरिटेबल ट्रस्ट, निर्मल छाया विकास समिति और जनकल्याण आमेर रोड़ विकास समिति के सहयोग से किया जा रहा है। श्री अकिंचन जी महाराज व्यासपीठ से दोपहर एक बजे से सांय पांच बजे तक कथा वाचन करते है।

देवस्थान विभाग के श्रीमद् भागवत कथा यज्ञ में रास लीला, कंस उद्धार, उद्धव प्रसंग और रुक्मणी विवाह के प्रसंग

देवस्थान विभाग द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह से पूरा वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया है। श्रोता पूरे मनोयोग से कथा श्रवण का आनंद ले रहे हैं वहीं रास लीला में महिलाओं-पुरुषों ने भक्तिभाव से नाचते हुए श्रीकृष्ण की लीला में मग्न हो गए। सात मार्च को सुदामा चरित्र, नवयोगेश्वर संवाद, 24 गुरुओं की कथा, परीक्षित मोक्ष और श्री शुकदेव जी के विदाई प्रसंगों पर प्रवचन होगा।

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