जयपुर। देवस्थान विभाग द्वारा आमेर रोड़ जल महल के सामने स्थित श्री बलदेव मंदिर पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में शनिवार को भगवान श्री कृष्ण की बाल लीला, माखन चोरी, मटकी फोडने, गोवर्धन पूजा के प्रसंगों को भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया। व्यासपीठ से प्रवचन करते हुए अकिंचन महाराज ने कहा कि पति पत्नी गाड़ी के पहियोें की तरह है और दोनों पहियों में समन्वय व सामजंस्य से ही सही तरीके से गाड़ी चलती है।
उन्होंने कहा कि गृहस्थाश्रम दूध, दही-माखन की तरह भोग का कारक है तो ईश्वर की आराधना से भोग के साथ ही भजन को भी स्थान दिया जाना जरुरी है। उन्होंने कहा कि केवल भोग से काम-क्रोध और लोभ-मोह जकड़ लेता है और इसलिए गृहस्थाश्रम में भोग और योग में सामजंस्य बनाना होगा। श्री अकिंचन जी महाराज ने विस्तार से गृहस्थ जीवन का सार समझाया।
श्रीमद्भागवत कथा यज्ञ के दौरान श्रोताओं ने भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का श्रृवणामृत लिया। भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का मंचन किया और माखन चोरी , मटका फोड़ने की लीला में महिलाएं और पुरुष खूब झूमे-नाचे। श्री गोवर्धन पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण के छप्पन भोग की झांकी सजाई गई। संपूर्ण वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो गया।
श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह का आयोजन देवस्थान विभाग द्वारा स्व. जय दयाल शर्मा मेमोरियल एण्ड चेरिटेबल ट्रस्ट, निर्मल छाया विकास समिति और जनकल्याण आमेर रोड़ विकास समिति के सहयोग से किया जा रहा है। अकिंचन महाराज व्यासपीठ से दोपहर एक बजे से सायं पांच बजे तक कथा वाचन करते है।

