यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स के पक्ष में उतरे CM, कहा- केंद्र मेडिकल कॉलेजों में और सीटें बढ़ाएं

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यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स के पक्ष में उतरे CM ,कहा मेडिकल कॉलेज और सीटें बढ़ाएं केंद्र

जयपुर : यूक्रेन में युद्ध के बाद वहां से वापस लौटे मेडिकल स्टूडेंट्स के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने यूक्रेन से लौटे स्टूडेंट्स के भविष्य के हित में केंद्र से फैसला करने की मांग उठाई है। गहलोत ने मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल की सीटों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया है। प्रदेश के 1000 से भी ज्यादा स्टूडेंट्स यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। अब युद्ध के बाद वापस लौटे स्टूडेंट्स की आगे की पढ़ाई पर संकट खड़ा हो गया है। ​

गहलोत ने कहा- यूक्रेन संकट के कारण भारत लौटे हजारों विद्यार्थियों का भविष्य भी अनिश्चित हो गया है। ऐसे में इन बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए एक सकारात्मक फैसला लेना चाहिए। भारत के हजारों बच्चे पढ़ाई के लिए विदेशों में जाते हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे मेडिकल की पढ़ाई के लिए चीन, नेपाल, यूक्रेन, रूस, किर्गिस्तान, कजाखिस्तान, बांग्लादेश इत्यादि देशों में जाते हैं, क्योंकि यहां खर्च कम होता है।

गहलोत ने कहा कि जब ये स्टूडेंट्स वहां से पढ़कर आते हैं तो इन्हें फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जाम (FMGE) देना पड़ता है। वहां के भाषाई और पाठ्यक्रम संबंधी बदलावों के कारण अधिकांश बच्चे (80% से भी अधिक) इस टेस्ट को पास नहीं कर पाते हैं और मेडिकल प्रेक्टिस से भी वंचित होते हैं। ऐसे में ये देश के ह्यूमन रिसोर्स की वैल्यू कम करता है और सभी का नुकसान भी होता है।

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गहलोत ने कहा कि यूक्रेन संकट ने हम सभी को विचार करने का एक मौका दिया है कि क्यों ना केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर देश में मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल सीटों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करें। यूपीए सरकार ने हर जिले में सरकारी मेडिकल कॉलेज खोलने की स्कीम शुरू की थी जो अब भी जारी है, उस समय 75 फीसदी पैसा केंद्र देता था। जिसे अब घटाकर 60 फीसदी कर दिया है।

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