जयपुर। राजस्थान विधानसभा के इतिहास में आज पहली बार बाल सत्र का आयोजन हुआ जिसमें देश-प्रदेश से 200 बच्चे विधायक और मंत्रियों की भूमिका में विधानसभा पहुंचे । बच्चों को मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, मंत्री और विधायक की भूमिका दी गई है। विधानसभा सदन में बच्चों के बैठने की व्यवस्था भी उसी हिसाब से की गई है।
विधानसभा स्पीकर सीपी जोशी ने उद्घाटन सत्र में कहा कि हमें बच्चों के मन की बात सुनकर उसके हिसाब से नीतियां बनाने पर सोचना होगा। केंद्रीय पंचायतीराज मंत्री के तौर पर जब मैं विदेश गया तो वहां लोकल सेल्फ गवर्नेंस पर चर्चा हो रही थी, वहां एक छात्र बैठा था। मैंने सोचा कि हमारे यहां लोकल सेल्फ गवर्नेंस में छात्रों को नहीं चुना जाता, छात्रों की समस्याओं को कौन उठाएगा? उस समय मैंने मन में कल्पना की कि हमें नए सिरे से देश की समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नीति बनाते वक्त बच्चों की बात भी सुननी चाहिए।
जोशी ने कहा कि बच्चों से पूछा जाना चाहिए कि वो किस तरह की सरकार चाहते हैं। हमारे संसदीय लोकतंत्र में और चर्चा के बाद निर्णय होते हैं, इसके बावजूद यहां जेपी आंदोलन हुआ, अन्ना आंदोलन हुआ और अब किसान आंदोलन हो रहा है। यदि लोकसभा और विधानसभाएं लोगों की उम्मीदों को पूरा नहीं करेगी तो संसदीय लोकतंत्र कमजोर होगा।
सीपी जोशी ने कहा कि हमें बीएड और टीचर्स ट्रेनिंग के पाठ्यक्रम में बदलाव करके उसमें ऑनलाइन क्लास को शामिल करना होगा।
उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि की भूमिका में आए 200 बच्चों के मन में जो कल्पनाएं हैं, वे जो विचार प्रकट करते हैं, उसका एनालिसिस होना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि बच्चों ने हमसे अच्छे अनुशासन में सदन चलाया है, हम तो सदन की कार्यवाही को डिस्टर्ब करते रहते हैं। सच्चाई को स्वीकार करने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। देश के 15 राज्यों से बच्चों को बुलाकर बाल सत्र आयोजित कर अध्यक्ष ने इतिहास बनाया है। हम वोटर की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करें।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कानून बनाते समय जनता की सक्रिय भागीदारी होगी तो ठीक से कानून बनने के साथ लागू हो पाएंगे। जनता की सक्रिय भागीदारी होना जरूरी है। बिरला ने कहा कि भारत के संविधान में अधिकार और जिम्मेदारियों का शानदार मिश्रण है। सवाल उठने से सरकारें जवाबदेह होंगी और शासन में पारदर्शिता आएगी। यह विधानसभाओं और संसद से ही संभव है। संविधान के साथ संसदीय प्रक्रियाओं को समझना जरूरी है। उन्होंने कहा कि वे लोकसभा में भी इस ही सत्र आयोजित करवाने का प्रयास करेंगे ताकि बच्चे संसदीय प्रणाली को अच्छे से जान सके।

