जयपुर। शहर के अतिरिक्त मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट क्रम-8 मेट्रो प्रथम ने ग्रेटर नगर निगम कमिश्नर से अभद्रता व मारपीट मामले में सोमवार को आरोपी पूर्व पार्षद पारस जैन, अजय सिंह व रामकिशोर प्रजापत की जमानत अर्जी खारिज कर दी। इसके साथ ही अदालत ने तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने के निर्देश दिए हैं।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पत्रावली से यह स्पष्ट है कि एक लोक सेवक ने आरोपियों के खिलाफ राजकार्य में बाधा व मारपीट सहित आरोप में एफआईआर दर्ज कराई है। लोक सेवक के साथ मारपीट करना गंभीर अपराध है। इसलिए उन्हें जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत की ओर से गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद सोमवार को तीनों आरोपियों ने कोर्ट में सरेंडर किया और जमानत अर्जी दायर कर जमानत मांगी थी। वहीं एक अन्य आरोपी शंकर शर्मा ने किडनी की बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती होने का हवाला देकर कोर्ट में पेश होने में असमर्थता जताई थी।
जमानत अर्जी में कहा गया कि उन्हें मामले में राजनीतिक द्वेषता के चलते फंसाया है। मामले में चालान पेश हो गया है और अन्य आरोपी सौम्या गुर्जर की जमानत हो चुकी है। इसलिए उन्हें भी जमानत पर रिहा किया जाए। लेकिन कोर्ट ने आरोपियों की दलीलों को मानने से इंकार करते हुए उनकी जमानत अर्जी खारिज कर दी। गौरतलब है कि इस मामले में कोर्ट ने निलंबित मेयर सौम्या गुर्जर को 13 जुलाई को जमानत दे दी थी।
मामले के अनुसार, नगर निगम कमिश्नर यज्ञमित्र सिंह ने सौम्या गुर्जर, तत्कालीन पार्षद पारस जैन, अजय सिंह, शंकर शर्मा और रामकिशोर प्रजापत के खिलाफ मारपीट और अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए ज्योति नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जिस पर अनुसंधान करते हुए पुलिस ने एक जुलाई को सौम्या सहित चारों पार्षदों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया था। कोर्ट ने चालान पर प्रसंज्ञान लेते हुए सौम्या के अलावा अन्य चारों आरोपियों के गिरफ्तारी वारंट जारी किए थे।
