जयपुर : राजस्थान हाईकोर्ट ने यूक्रेन में युद्ध के हालातों में फंसे राजस्थान सहित सभी भारतीय स्टूडेंट्स की जीवन सुरक्षा को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने केन्द्र और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। हाईकोर्ट ने राजस्थान सरकार से यूक्रेन में पढ़ रहे प्रदेश के स्टूडेंट्स की जानकारी मांगी है। कोर्ट ने राज्य सरकार के एडवोकेट जनरल एमएस सिंघवी को 5 मार्च को प्रदेश के स्टूडेंट्स की स्थिति कोर्ट के सामने रखने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता के एडवोकेट सुदर्शन लड्ढा ने यूक्रेन के सूमी शहर में भारी गोलाबारी में फंसे 1 हजार से ज्यादा भूखे-प्यासे भारत के राजस्थान और दूसरे प्रदेशों के स्टूडेंट्स का दर्द बताया। लड्ढा ने सूमी में फंसे छात्रों की ओर से गुरुवार को संकटग्रस्त भारतीयों की सहायता के लिए काम करने वाले बूंदी के सामाजिक कार्यकर्ता चर्मेश शर्मा को भेजी गई। 682 स्टूडेंट्स के नाम और पासपोर्ट नम्बर सहित लिस्ट भी हाईकोर्ट के सामने पेश करते हुए उनकी जिंदगी बचाने की गुहार लगाई। साथ ही जिनेवा संधि का भी हवाला दिया गया।
इसके तहत युद्ध वाले क्षेत्र के साथ-साथ वहां नागरिकों के अधिकारों, संरक्षण और सुरक्षा का प्रोविजन है। जिनेवा कन्वेंशन को मानने वाले देशों की सदस्य संख्या 194 है। जिसमें भारत और यूक्रेन भी शामिल हैं। इसमें किसी को डराने-धमकाने, अमानवीय बर्ताव करने, जाति-धर्म, जन्म स्थान के बारे में नहीं पूछने की पाबंदियां हैं। साथ ही खाने-पीने,जरूरत की सभी चीजें देने, उचित देखरेख करने, मानवाधिकारों के संरक्षण के प्रोविजन हैं।
विदेश मंत्रालय, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सभी से गुहार लगाई
एडवोकेट सुदर्शन लड्ढ़ा ने बताया कि 24 जनवरी को ऑस्ट्रेलिया ने एडवाइजरी जारी कर युद्ध के हालात पैदा होंगे बता दिया। अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए एक्शन ले लिया। भारत सरकार ने 13 फरवरी तक कोई एक्शन नहीं लिया। यूक्रेन के एमबीबीएस कराने वाले यूनिवर्सिटी-कॉलेजों ने ऑफलाइन क्लास अटैंड नहीं करने पर आर्थिक पैनल्टी और डिसिप्लीनरी एक्शन लेने शुरू कर दिए। इस कारण स्टूडेंट्स वहां से निकल नहीं सके। लेकिन ऑनलाइन क्लासेज के लिए भारत सरकार,विदेश मंत्रालय,एम्बेसी की ओर से कोई डिमांड यूक्रेन से नहीं रखी गई। 13 फरवरी को सामाजिक कार्यकर्ता चर्मेश शर्मा ने विदेश मंत्रालय, राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री सभी से गुहार लगाई कि 20 हजार भारतीयों का जीवन यूक्रेन में खतरे में है। सभी को तुरंत भारत सुरक्षित ले आया जाए,वरना बड़ी अनहोनी हो सकती है।
चर्मेश शर्मा पहले भी विदेशों में मौजूद 1 हजार से ज्यादा नागरिकों के लिए कई काम कर चुके हैं। उन पैरेंट्स ने भी उनसे सम्पर्क किया। जब लैटर लिखा तो भारत सरकार ने 15 फरवरी को साधारण एडवाइजरी जारी की, कि जिन स्टूडेंट्स को आवश्यक काम हो वही यूक्रेन में रुकें, वरना भारत वापस लौट आएं। इसके बाद 16 फरवरी को भी साधारण एडवाइजरी जारी की। 17 फरवरी तक फ्लाइट्स पर प्रतिबंध रहे। 18 फरवरी को प्रतिबंध रिमूव किए। 21 से 26 फरवरी तक करीब 8 दिन में भारत सरकार ने केवल 3 ही फ्लाइट यूक्रेन भेजीं। एक फ्लाइट में 256 लोग ही आ सकते थे। जोकि बहुत कम है। यूक्रेन में भारतीय एम्बेसी पर वहां स्टूडेंट्स की मदद नहीं करने, रेस्पॉन्स नहीं देने, 20 हजार की हवाई टिकट 90 हजार रुपए तक महंगी हो जाने, उसमें भी भारत वापसी की गारंटी नहीं होने की बात भी कोर्ट को बताई गई।
बच्चों की सुरक्षा और वापसी की मांग
अभिभावक भागीरथ राठौर और दिनेश भार्गव ने यूक्रेन में पढ़ने गए अपने बच्चों दीपक राठौर और स्वर्णा भार्गव समेत राजस्थान और देशभर के हजारों बच्चों की जीवन सुरक्षा और सुरक्षित भारत वापसी के लिए यह याचिका लगाई है। इसमें कहा गया कि फरवरी महीने की शुरुआत में ही यूक्रेन में हालात बहुत ज्यादा बिगड़ चुके थे। नॉर्वे, जापान, इजरायल, यूके समेत कई देशों ने अपने नागरिकों को वहां से निकालना शुरू कर दिया था। यूक्रेन में अपने बच्चो की चिन्ता में याचिकाकर्ताओं ने बूंदी के सामाजिक कार्यकर्ता चर्मेश शर्मा से मदद मांगी। जिसके बाद शर्मा ने 13 फरवरी को भारत के विदेश मंत्रालय में अधिकृत शिकायत दर्ज करवाते हुए यूक्रेन में हजारो भारतीय स्टूडेंट्स की जिन्दगी खतरे में बताते हुए भारत सरकार से उन सभी को तुरंत भारत लाने की मांग की थी।
आरोप है कि शिकायत पर विदेश मंत्रालय ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा जिन स्टूडेंट्स का यूक्रेन में रुकना जरूरी नहीं है। वो अस्थायी रूप से भारत लौट सकते हैं। लेकिन विदेश मंत्रालय ने उस वक्त स्टूडेंट्स को भारत लाने का कोई एक्शन नहीं लिया। जिन स्टूडेंट्स ने अपने लेवल पर लौटने की कोशिश की। उन्हें वक्त पर फ्लाइट नहीं मिली। एयर टिकिट की रेट भी कई गुना बढ़ गईं।
भारत सरकार ने ऑपरेशन गंगा की जानकारी दी
ऑनलाइन कोर्ट में उपस्थित भारत सरकार का एडिशनल सॉलिसिटर जनरल आर.डी. रस्तोगी से कोर्ट ने पूछा कि भारत सरकार की ओर से यूक्रेन में फंसे भारतीय स्टूडेंट्स की सुरक्षा और उन्हें वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इस पर एएसजी रस्तोगी ने केन्द्र की एडवाइजरी और ऑपरेशन गंगा के तहत यू्क्रेन के पड़ोसी देशों रोमानिया और पोलैंड के रास्ते 6400 स्टूडेंट्स और भारतीय नागरिकों की भारत वापसी की जानकारी दी। उन्होंने कहा केन्द्र सरकार गम्भीरता से यूक्रेन में फंसे छात्रों और नागरिकों की वापसी की पूरी कोशिश कर रही है। यूक्रेन में भारतीय दूतावास भी समय-समय पर एडवायजरी जारी कर रहा है। इसके अलावा अगर कोर्ट का कोई सुझाव होगा,तो उस पर भी कार्यवाही की जाएगी।
राजस्थान के एजी लेंगे ACS होम से राजस्थान के स्टूडेंट्स की जानकारी
राजस्थान सरकार के एजी एमएस सिंघवी भी कोर्ट में वीसी के जरिए मौजूद रहे। उन्होंने कहा-वह भी इस मुद्दे पर एसीएस होम से चर्चा करेंगे और यूक्रेन में फंसे राजस्थान के स्टूडेंट्स की जानकारी लेंगे। यह जानकारी एएसजी रस्तोगी को उपलब्ध करा दी जाएगी। सुनवाई करते हुए जस्टिस अशोक कुमार गौड़ ने कहा कि यूक्रेन में युद्ध के हालातो में भारतीय स्टूडेंट्स के जीवन की सुरक्षा को लेकर हम सभी चिंतित हैं। उन्होंने मामले में 5 मार्च को अगली सुनवाई रखी है।

