जयपुर। कोविड के इस बुरे दौर ने पूरी दुनियां को परेशानी में डाला तो कुछ अच्च्छा भी हुआ। कई तरह के बदलाव हमारी आपकी दिनचर्या में आएं और राजकाज की व्यवस्थाएं तथा कामकाज का ढंग भी बदला।
राजस्थान को ही ले तो यहां ई गर्वनेंस का प्रयोग सीमित था। वीडियों कांफे्रसिंग पर होने वाली चर्चा और बैठकें नाममात्र की होती थी,लेकिन कोविडकाल में आए इस आमूलचूल परिवर्तन आश्चर्यजनक है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने देश में ई-गवर्नेंस से शासन संचालन का अनूठा उदाहरण गढ़ डाला। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने धर बैठे वर्चुअल बैठकों के माध्यम से ना केवल कोरोना की पहली लहर को नियंत्रित करने में सफलता हासिल की,बल्कि दूसरी लहर को भी काफी हद तक आखिर नियंत्रित कर ही डाला।
जो मंत्री वर्चुअल संवाद से दूर भागते थे वे भी कर रहे है वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग
मुख्यमंत्री ने पिछले साल मार्च में शुरू हुए कोरोनाकाल से अब तक 325 से ज्यादा वीडियो कांफे्रसिंग कर डाली हैं। मुख्यमंत्री ज्यादातर कांफे्रस कोविड को लेकर की गई । मुख्यमंत्री की ओर से किए गए वर्चुअल संवाद में 99 प्रतिशत कोविड प्रबंधन को लेकर ही थे। मुख्यमंत्री की पहल का असर यह हुआ कि जो मंत्री लेपटॉप पर बैठकें लेने या उससे जुडऩे से दूर भागते थे वे अब न केवल मुख्यमंत्री के साथ बैठकों में जुड़ रहे हैं,बल्कि अपने-अपने विभागों की बैठकें भी वर्चुअल संचालित कर रहे हैं।

गहलोत ने अपने ई-गवर्नेंस में सभी को शामिल किया। उन्होंने अपने कैबिनेट की बैठक से लेकर गांव में बैठे वार्ड पंचों तक से वीडियो कांफे्रसिंग के जरिए कोराना रोकथाम के लिए संवाद किया। वीसी के जरिए हुई कई बैठकों को जनता के लिए ओपन रखा गया। इन बैठकों को लाखों आम लोगों ने देखा और सुझाव दिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तरह ई गर्वनेंस को लेकर राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की चर्चा होने लगी हैं।
सीएम क्वारंटाइन रहे पर वीसी बंद नहीं हुई
कोराना की दूसरी लहर में मुख्यमंत्री गहलोत खुद संक्रमित हो गए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने खुद को क्वारंटाइन कर लिया लेकिन उन्होंने इसके बावजूद भी वीसी के जरिए समीक्षा बैठकों का दौर जारी रखा। हर रोज रात आठ बजे गहलोत अधिकारियों और अपने मंत्रिमण्डल के सदस्यों के साथ चर्चा करते थे। इस दौरान भी कोविड प्रबंधन में आगे की योजनाओं पर काम जारी रहा। 11 अप्रैल को मुख्यमंत्री ने कोविड और मुख्यमंत्री चिरंजीवी योजना को लेकर गांव स्तर तक चर्चा की। इसमें हजारों जनप्रतिनिधियों को भी जोड़ा गया।
आमजनता के भी सुझाव लिए वीसी के जरिए
कोविड की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने से पहले मुख्यमंत्री ने विशेषज्ञों और विपक्षी नेताओं के साथ वीसी के जरिए चर्चा की। इस वीसी को आमजनता के लिए भी ओपन रखा गया। यूटुब और फेसबुक के माध्यम से हजारों लोगों ने इन्हें देखा और सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने भी इन सुझावों को गंभीरता से लेते हुए कई निर्देश भी दिए। विपक्ष के नेताओं और विधायकों के साथ मैराथन वीसी का दौर चला।
दो दिन तक चले इस दौर में मुख्यमंत्री ने एक-एक विधायक से बात की और उनके सुझाव लिए। सांसदों के साथ भी गहलोत ने इस तरह से चर्चा कर अपनी बात भी रखी और सुझाव भी लिए। गहलोत ने वीसी के जरिए दस मई को ग्राम स्तर तक जनप्रतिनिधियों से संवाद किया। आमजनता में कोविड की गंभीरता को मैसेज देने के लिए वीसी को ओपन रखा गया। इस वीसी को अकेले फेसबुक के माध्यम से 698000 लोगों ने देखा। लाखों लोगों ने यूटुब के माध्यम से वीसी को देखा। फेसबुक में हजारों लोगों ने कमेंट करके सुझाव भी दिए।
