सवाई माधोपुर: रणथंभौर में एक बार फिर बाघों की संख्या बढ़ गयी है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघिन ऐरोहेड टी -84 ने दो शावकों को जन्म दिया है। इनको मिलाकर अब इस रिजर्व में बाघों की संख्या 70 हो गई है। यह संख्या अब तक की सबसे अधिक बताई गई है। वर्ष 2004-05 में जब सरिस्का में शिकार के कारण बाघ खत्म हो गए थे, तब यहां बाघों की संख्या करीब 22 के आसपास थी। बाघिन एरोहेड टी -84 नाल घाटी वन क्षेत्र मे वन कर्मियों को मंगलवार दो शावकों के साथ नजर आई। दोनों की किलकारी भी वन विभाग के कर्मचारियों ने सुनी।
तीसरी बार दिया शावकों को जन्म
बाघिन एरोहेड टी -84 ने तीसरी बार शावकों को जन्म दिया है। इससे पहले भी यह बाघिन दो बार शावकों को जन्म दे चुकी है। पूर्व में पहली बार एरोहेड ने दो शावकों को जन्म दिया था। ये शावक नालघाटी पर बाघिन के साथ दो शावक नजर आए थे। वे भी कुछ दिनों के बाद लापता हो गए, जिनका आज तक वन विभाग कुछ पता नहीं लगा सका। इसके बाद साल 2018 में बाघिन ने दो फीमेल शावकों को जन्म दिया, जिन्हें रिद्धि व सिद्धि के नाम दिया गया था। पूर्व में वन विभाग की ओर से इन्हें टी-123 व टी-124 नम्बर दिए थे। यह बाघिन वर्तमान में जोन तीन व चार में विचरण करती है।
बाघिन टी-16 यानि मछली की दोहती
बाघिन एरोहड यानि टी-84 बाघिन कृष्णा यानि टी-19 की बेटी और रणथम्भौर की प्रसिद्ध बाघिन टी-16 यानि मछली की दोहती है। पहली बार बाघिन एरोहेड 23 मार्च 2014 को नेचर गाइड रामसिंह मीणा व यूके के पर्यटक ओलविर गेल को नजर आई थी। बाघिन की उम्र करीब सात साल है। वर्तमान में यह बाघिन जोन दो व तीन में विचरण करती है।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाघों का कूनबा बढ़ने से रणथंभौर में पर्यटकों की आवाजाही अधिक बढ़ेगी। वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए पेड़ों पर ट्रेकिंग कैमरों की संख्या बढ़ाई जा रही है।
