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गर्भस्थ शिशु संवाद से होता है बच्चे का सम्पूर्ण मानसिक विकास: एरन

जयपुर। गायत्री परिवार राजस्थान की ओर से आयोजित की जा रही आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी निशुल्क ऑनलाइन कार्यशाला के पांचवें दिन मंगलवार को ‘सद्गुणी संतान हेतु गर्भ संवाद’ विषय पर चर्चा हुई। गायत्री चेतना केंद्र दुर्गापुरा से  जोन समन्वयक सुशील शर्मा ने गायत्री महामंत्र के साथ कार्यशाला का शुभारंभ किया मुख्य वक्ता अर्पिता एरन ने कहा कि गर्भस्थ शिशु जिस तरह आहार के लिए मां पर निर्भर है, उसी तरह विचार के लिए भी मां पर निर्भर है। मां को दिया भोजन, दवाएं और इंजेक्शन गर्भस्थ शिशु तक पहुंच जाता है। इसी तरह मां से किया संवाद गर्भ तक पहुंच जाता है। माँ की आंख से बच्चा देखता है, मां के कान से सुनता है, मां के मन में उठ रहे विचार बच्चे के अंदर भी वही भाव उतपन्न करते है। माँ जो नया कुछ सीखती है वो बच्चा भी सिखता है।

उन्होंने कहा कि गर्भावस्था में मां को मधुर संगीत सुनना चाहिए, अच्छे शब्दों वाले गीत गुनगुना चाहिए। महापुरुषों की कहानियां बोलकर पढ़ना चाहिए। गर्भस्थ शिशु से पिता को भी बातें करनी चाहिए, उसे रोज बाल निर्माण की कहानियां सुनाना चाहिए। बच्चे को गर्भ से ही जिंदगी में उसकी उपस्थिति और परिवार का सदस्य होने की अनुभूति करवाइये।
जैसे बेल बजी और पतिदेव घर आये, तो मां पेट पर हाथ रख के बोले बेटा आपके पापा घर आ गए। पिता बोले बेटा मैं घर आ गया।

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जब भोजन करें तो गायत्री मंत्र बोलने के बाद गर्भस्थ शिशु को बोलें अब मम्मी खाना खाएगी, ये खाना आपको अच्छा स्वास्थ्य देगा। पानी पिएं तो भी बोल के पिये। कोई भी अच्छा कार्य करने के साथ उसे बताते चलें, जिससे सभी गतिविधि सही ढंग से उसके दिमाग़ में रजिस्टर होती रहे। माता-पिता और बच्चे के बीच में सम्बन्ध अच्छे बने।

टीवी-फ़िल्म-सीरियल या घर के लड़ाई झगड़े की आवाज़े और दृश्य गर्भवती मां के सामने न आये। अन्यथा इनका नकारात्मक प्रभाव गर्भस्थ शिशु के दिमाग मे रजिस्टर हो जाएगा। गर्भ में ही घर के अन्य सदस्य जब बोलें तो माँ बोले ये आवाज तुम्हारी बुआ की ये दादी की आवाज है, ये दादा की आवाज है, ये नाना की आवाज है, ये नानी की आवाज है।
मां को संस्कृत सीखना चाहिए, जोर-जोर से संस्कृत के गायत्री मंत्र और महामृत्युंजय पढ़ना चाहिए, मंत्रलेखन करना चाहिए। बच्चे के गर्भ संवाद के दौरान सँस्कार गढ़ने और नई अभिरुचि उसमे पैदा करने का प्रयास करना चाहिए। जिस महापुरुष की तरह बच्चा बनाना चाहते है उनकी जीवनियां पढ़िए। अच्छी नैतिक शिक्षा, मानसिक संतुलन, धार्मिक पुस्तको को बोलकर पढ़िए।

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दो मनपसन्द भजन चुन लीजिये, सुबह वाले भजन को सुनते हुए उठिए, और रात वाले भजन को सुनते हुए सो जाइये। जब बच्चा पैदा होगा, तो ज्यो ही उसके कान में सुबह वाला भजन बजेगा वो घड़ी के अलार्म की तरह उसे सुनते ही उठ जाएगा। ज्यों ही रात वाला भजन बजेगा वो लोरी की तरह उसे सुला देगा। क्योंकि जो आदत गर्भ में पड़ती है वो जल्दी छूटती नहीं। कार्यशाला के अंतिम आधे घंटे में विभिन्न महिलाओं ने प्रश्न पूछ कर अपनी जिज्ञासा शांत की। कार्यशाला के छठे दिन बुधवार को गर्भस्थ शिशु का बहु प्रतिभा विकास पर श्रद्धा साहू का उद्बोधन होगा।

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