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खबर का असर : पूर्व सैनिकों का कोटा क्लोज, आरपीएससी ने हाल ही में कर दिया था ओपन

जयपुर। राज्य सरकार ने पूर्व सैनिकों की सरकारी सेवा में विशेष कोटे में राजस्थान को छोड़कर बाहरी प्रदेशों को इसका लाभ न देने की मांग को मान लिया है। राज्य सरकार ने इसके लिए सिविल सेवा नियमों में भी संशोधन किया है। आपकों बता दें कि हाल में राजस्थान प्रशासनिक सेवा भर्ती 2021 के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग ने जो विज्ञप्ति जारी की थी उसमें पूर्व सैनिकों के इस कोटे को ओपन कर दिया गया था। पूर्व सैनिकों ने इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी, आखिर उनकी जीत हुई। सरकार ने उनकी मांग को मान लिया है। RPSC का RAS की नई भर्ती में राजस्थान के पूर्व सैनिकों के कोटे पर प्रहार, खोल दिए सभी राज्यों के लिए प्रवेश द्वार शीर्षक से 22 जुलाई को impactvoice.news से सबसे पहले प्रसारित की गई थी।

पूर्व सैनिकों की हुई जीत

आरपीएससी ने कार्मिक विभाग के 12/07/2021 के पत्र का हवाला देते हुए पूर्व सैनिकों के विशेष कोटे को अन्य राज्यों के लिए भी ओपन कर दिया था। जबकि अन्य कैटेगिरी राजस्थान का मूल निवासी होने की अनिवार्यता ही रखी गई थी। जैसे ही आरपीएससी भर्ती की विज्ञप्ति ने यह चौकाने वाला तथ्य सामने आया तो पूर्व सैनिक लामबंद हो गए और उन्होंने इसका विरोध किया। इस विरोध के चलते सरकार को सेवा नियमों में संशोधन कर यह आदेश वापस लेने पड़ा।

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ये था पुराना आदेश, जो अभी हाल में आरपीएससी 2021 की भर्ती में जोड़ा गया था।
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ये है नया आदेश। पूर्व सैनिको के विरोध के बाद सरकार ने निकाला।

राजस्थान प्रशासनिक सेवा में आरएएस, आरपीएस सहित प्रमुख पदों के लिए 5 प्रतिशत तथा 12.5 प्रतिशत अधीनस्थ सेवाओं में कोटा है। हाल ही में पूर्व सैनिकों की कैटेगिरी को ओपन करने से सबसे बड़ा खतरा यह था कि कहीं हरियाणा आदि पड़ोसी राज्यों के सैनिक प्रशासनिक सेवाओं के प्रमुख पदों पर काबिज न हो जाए। पूर्व सैनिकों के संगठनों का आरोप भी था कि उनके कोटे को पड़ोसी राज्यों के पूर्व सैनिकों को लाभ देने के लिए ही ओपन किया गया है। सरकार ने अभी 28 जुलाई से इसके आवेदनों को इन्हीं शिकायतों को देखते हुए आरपीएससी से कहकर टलवाया था। हालांकि आरपीएएसी का तर्क था कि ऑनलाइन आवेदनों में कुछ तकनीकी खामियों के कारण से आवेदन भरने की तिथि को स्थगित किया गया है। पूर्व सैनिकों के विभिन्न संगठनों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है।

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