पढ़ी-लिखी बालिकाएं परिवार, समाज और देश की प्रगति का आधार- जोशी

- हवामहल विधानसभा क्षेत्र में बालिकाओं को साइकिल वितरण कार्यक्रम

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जयपुर। जलदाय एवं भूजल मंत्री डॉ. महेश जोशी ने कहा है कि पढ़ी-लिखी बालिकाएं परिवार, समाज और देश की प्रगति का आधार है इसीलिए राज्य सरकार बालिका शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष अभियान चला रही है। उन्होंने कहा कि बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा किसी भी स्तर पर कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। डॉ. जोशी शनिवार को जयपुर में हवा महल विधानसभा क्षेत्र के तहत राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बंधा बस्ती में बालिकाओं को साइकिल वितरण के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस दौरान विद्यालय में दो कमरे एवं एक शौचालय के निर्माण के लिए सहयोग की भी घोषणा की।

जलदाय एवं भूजल मंत्री जोशी ने कहा किए यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की पहल पर आयोजित किया गया है। उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए पढ़ाई-लिखाई सबसे जरूरी काम है, लेकिन अध्ययन के साथ-साथ फिजिकली फिट रहने के लिए बालक एवं बालिकाएं खेल और व्यायाम पर भी पूरा ध्यान दें। जहां जिसको मौका मिले तो अपने माता-पिता की अनुमति से खेलकूद गतिविधियों में आवश्यक रूप से भाग लें। यदि मैदान पर खेलने का अवसर ना मिले तो बालक-बालिकाएं घर पर ही व्यायाम करें, इससे इससे शरीर तो स्वस्थ रहता ही है, साथ ही पढ़ाई लिखाई में भी मदद मिलती है।

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डॉ. जोशी ने कहा कि जो बच्चे पढ़ाई-लिखाई में अग्रणी रहते हैं वे जीवन में दूसरों के मुकाबले ज्यादा तरक्की करते हैं। उन्होंने कहा कि आज का जमाना बालिकाओं का जमाना है जितना लड़कों का पढ़ना जरूरी है उतना ही लड़कियों की शिक्षा भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पढ़-लिखकर सच्चाई की राह पर चलते हुए देश की सेवा में अलग मिसाल कायम की।

जलदाय एवं भूजल मंत्री जोशी ने कहा कि बच्चों की पहली गुरु मां होती है, ऐसे में माता का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। मां हमेशा चाहती है की उसके बच्चे पढ़ लिख कर जीवन में प्रगति के नए सोपान तय करें। उन्होंने कहा कि बालिकाएं हमारे लिए देवियों का स्वरूप है, उनसे भी बढ़कर है ऐसे में सरकार उनकी सेवा करते हुए उनको आगे बढ़ने में सहयोग करने के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वह ईमानदारी से अपना कार्य करते हुए बच्चों की शिक्षा के लिए लगातार मेहनत करें, वही अभिभावक और समाज के लोग भी बच्चों की शिक्षा के प्रति अपनी जिम्मेदारी को बढ़-चढ़कर निभाएं।

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