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Covid-19: अब राजस्थान के खीरवा गांव ने पेश की मिसाल

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लक्ष्मणगढ़ (सीकर)। गांव वाले ठान ले तो कोरोना को भी भागना ही पड़ता है। चितौड़ जिले की निम्बाहेड़ा तहसील के गादोला गांव के बाद सीकर जिले की लक्ष्मणगढ़ तहसील के गांव खीरवा के ग्रामीणों ने भी कुछ ऐसी ही ठानी की अब तीन दिनों से कोरोना का नया संक्रमित मरीज़ सामने नहीं आया है। खीरवा के ग्रामीणों ने सरकारी सहायता का बिना इंतज़ार किए अपने दमखम पर कोविड सेंटर स्थापित कर दिया जिसमें पहले से पीड़ितों का इलाज चल रहा है।

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अब जाकर रुका मौतों का सिलसिला

इस कोविड सेंटर में ऑक्सीजन युक्त बेड भी है, जहां पीड़ित धीरे-धीरे रिकवर कर रहे हैं। इतना ही नहीं आसपास के गांवों में भी मुनादी फिरवादी की कि उनके गांव में कोई पॉजिटिव है तो उनके यहां कोविड सेंटर में भेज दे, संभाल तथा इलाज की जिम्मेदारी उनकी हैं। यह दीगर बात है कि देरी और नासमझी के कारण गादोला की तरह खीरवा ने भी 21 अपनो को खो दिया पर अब मौत का सिलसिला भी अब रुक सा गया है।

अन्य गांवों के लिए भी अनुकरणीय उदाहरण 

कोरोना के डर व आशंका से उबरने की जो मिसाल खीरवा गांव के युवाओं ने पेश की है, वो अन्य गांवों के लिए भी अनुकरणीय बन गई है। गांव में एक के बाद एक मौतों के सदमे से विचलित होने के बजाय युवाओं व ग्रामीणों ने परिस्थितियों को ही सकून में बदल डाला।

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प्रवासियों ने भी दिया साथ

सैनिक कल्याण कार्यालय में तैनात शहीद के पुत्र अरशद अयूब पठान ने बताया कि संक्रमण रोकने की पहल करते हुए अरब देशों में रहने वाले प्रवासियों के सहयोग से कंसंट्रेटर खरीदे। गांव के मदरसे में बनाए गए क्वारेंटाइन व कोविड केयर सेंटर में पॉजिटिवो को भर्ती कर लिया। समय पर मिले इलाज का परिणाम यह हुआ कि एक महिला का ऑक्सीजन लेवल 74 से 96 आ गया। गांव की पीएचसी में तैनात डॉ. रमजान एएनएम सुमित्रा, एलटी शाहिद पठान के सहयोग के लिए गांव के निवासी नर्सिंग ऑफिसर इरफान चौधरी व अशरफ एंथोनी लगातार कोविड केयर सेंटर पर मरीजों की देखभाल कर रहे हैं।

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हौसला अफजाई

मदरसे के मौलाना महमूद हसन कासमी गांव के मौजिज लोगों के साथ युवा टीम की हौसला अफजाई कर मनोबल बढ़ा रहे हैं। उन्होंने आसपास के गांवों के संक्रमितों को भी मदरसे में बने केयर सेंटर में आने की पेशकश की है। गांव के युवा घर-घर जाकर लक्षण दिखाई देने वालों को दवाई पहुंचा रहे हैं। शहीद फूल मोहम्मद के पुत्र सब इंस्पेक्टर सुहेल पठान ने भी अपने परिवार की ओर से संसाधन व उपकरण दिए है। गांव के युवाओं की पहल से 21 मौत हो जाने से उपजे डर व आशंका के माहौल से लोग धीरे-धीरे उबर रहे हैं।

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