बीकानेर: कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष एवं शिक्षा राज्यमंत्री गोविंद सिंह डोटासरा अपने व्यवहार से आमतौर पर चर्चा में बने रहते है। ऐसा ही वाक्या उनके बीकानेर दौरे के दौरान सामने आया है। डोटासरा अपनी ही पार्टी की वरिष्ठ महिला नेता से उलझ गए और इसके बाद खूब हंगामा हुआ। उनके व्यवहार से व्यथित एक महिला पार्षद और मेयर प्रत्याशी अंजना खत्री ने सर्किट हाउस में परिसर में शनिवार को खूब खरी-खरी सुना दी। दरअसल अंजना के अलावा अन्य महिला पार्षदों ने भी दबी जुबान में मंत्री के व्यवहार पर नाराजगी जताई।
घटनाक्रम के अनुसार यह है मामला
बीकानेर की वरिष्ठ महिला नेता अंजना खत्री ने बताया कि वो कुछ महिलाओं के साथ प्रदेशाध्यक्ष से मिलने पहुंची थीं। इस दौरान कुछ महिलाओं ने फोटो खिंचवाने की इच्छा जताई। इस पर प्रदेशाध्यक्ष झल्ला गए और कहा कि आप लोग जाइये यहां से। एक बार तो सभी महिला कार्यकर्ता हट गईं, लेकिन बाद में स्वयं खत्री मंत्री के पीछे गई और कहा कि पार्टी के विषय में एक मिनट बात करनी है। इस पर डोटासरा फिर नाराज हो गए। कहा कि आप जाइये। इस पर खत्री ने पूछा कहां जाएं? घर जाएं क्या? इस पर डोटासरा ने कहा- हां घर जाइए। अब खत्री का भी पारा चढ़ गया। उन्होंने प्रदेशाध्यक्ष से सबके सामने कहा कि हमारा घर तो ये बीकानेर ही है, आप जाइये यहां से? इतना कहने के बाद खत्री कार्यकर्ताओं के बीच पहुंच गईं और चिल्लाकर अपने ही प्रदेशाध्यक्ष के बारे में कहा कि ये बदतमीजी नहीं चलेगी। हमें कहा जा रहा है कि जाओ अपने घर। अगर इसको जरूरत ही नहीं है तो ये जाएं अपने घर। इस पूरे मामले की किसी ने वीडियो बना ली। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
स्थानीय नेताओं के समझाने पर वापस बुलाया
बाद में अंजना खत्री सहित सभी महिला नेता सर्किट हाउस से निकल गईं। कुछ स्थानीय नेताओं ने डोटासरा को बताया कि वो सामान्य कार्यकर्ता नहीं हैं बल्कि मेयर की उम्मीदवार रही हैं। बाद में अंजना खत्री को वापस बुलाया गया। इसके बाद डोटासरा ने कहा कि वो सबसे मिलने के लिए ही आए हैं। बाद में नेत्रहीन विद्यालय में भी अंजना खत्री डोटासरा के कार्यक्र्म में पहुंचीं, लेकिन प्रदेशाध्यक्ष ने ज्यादा महत्व नहीं दिया।
डोटासरा बात सुनने के बजाय जाइए-जाइए कहने लगे
खत्री ने बताया कि हम तो डाेटासरा से यह कहने गए थे कि नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के लिए किसी को भी जिम्मेदारी देने का काम करें। निगम में हमें भाजपा से लड़ना होता है। अब तक कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं बना। बात सुनने की बजाय वो जाइए, जाइए करने लगे।
