जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज भविष्य में रिटायर होने की अटकलों पर विराम लगाते हुए साफ संकेत दे दिया कि वे ताउम्र राजनीति से सन्यास लेने वाले नहीं हैं। गहलोत ने दूसरे बुजुर्ग नेताओं का उदाहरण देते हुए साफगोई से अपनी मंशा से उन नेताओं को ये भी अवगत करवाया जो उम्मीद लगाए बैठे थे कि ये मुख्यमंत्री का चुनावी राजनीति का आखिरी टर्म होगा। गहलोत ने कॉन्सटिट्यूशन क्लब के शिलान्यास कार्यक्रम में बोलते हुए कहा कि बुढ़ापे में राजनीति सेहत के लिए जरूरी है, इसलिए अंतिम सांस तक हमें जनता की सेवा करने की जरूरत है। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना ये भी कह दिया कि युवा नेताओ की रगड़ाई होनी चाहिए।
गहलोत ने कहा कि पॉलिटिशियन को ज्यादा लोगों से मिलना पड़ता है, तो दुखी होता है। जब उससे लोग मिलने नहीं आते तो भी वह दुखी होता है कि कहीं दुकान तो बंद नहीं हो रही है। उन्होंने कहा मैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को सलाह देना चाहूंगा कि 75 साल के बाद नेता को घर बैठाने का उनका फैसला अच्छा नहीं है। कभी कांग्रेस में कामराज का फैसला हुआ था कि 60 साल के नेता को राजनीति से निकाल दो। मैंने पता किया है कि पहले के दौर में 34 साल व्यक्ति कि एवरेज उम्र होती थी। 1960 में जब कामराज जी ने फैसला किया तब एवरेज उम्र 40 थी। अब औसत उम्र 70 साल है।
उन्होंने समारोह में मौजूद नेताओं को इंगित करते हुए कहा कि यहां कई ऐसे मंत्री नेता बैठे हैं हेमाराम चौधरी, शांति धारीवाल, गुलाबचन्द कटारिया, डॉ सीपी जोशी जैसे नेता क्या बूढ़े दिखते हैं। 10 किलोमीटर रोज चलते हैं। एसेम्बली और बाहर भी मुकाबला करते हैं। गुलाबचन्द कटारिया को राज्यपाल बना दें तो बात अलग है। गहलोत ने चुटकी लेते हुए राजेन्द्र राठौड़ से कहा आप तो स्व. भैरों सिंह शेखावत के शागिर्द रहे हो। बताओ हम रिटायर हो जाएं तो कहां जाएं। घर बैठ जाएंगे तो लोग मिलने भी नहीं आएंगे। स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा। आपको अगर यह कह दिया जाए कि उम्र हो गई है,घर बैठ जाओ, तो स्वास्थ्य बिगड़ जाएगा। इसलिए यह हमारे इंट्रेस्ट की बात नहीं है, सेहत के लिए जरूरी है। क्योंकि बुढ़ापे में स्वास्थ्य खराब हो जाए तो क्या मतलब निकलेगा। हमने ऐसा क्या गुनाह किया है। जिन्दगी भर जनता के काम में लगा दी। अब बीमार हो जाएं। तो हुलिया ही बिगड़ जाता है। हम अपना हुलिया क्यों बिगाड़ें।
युवा नेताओं के लिए ये कही बड़ी बात
मुख्यमंत्री गहलोत ने युवा पीढ़ी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रगड़ाई करवाने की भी नसीहत दी। उन्होंने कहा जो युवा नेता-कार्यकर्ता राजनीति में ऊपर आ रहे हैं। उनकी रगड़ाई यानी ग्रूमिंग जरूरी है, क्योंकि जो संगठन में रहकर लम्बे वक्त तक रगड़ाई करवाकर कुर्सी पर आता है उसका व्यवहार, काम करने का तरीका, अनुभव सब अलग ही होता है। वह उसके मिलने और लोगों से बात करने में भी नजर आता है। नए लोग भी मंत्री, मुख्यमंत्री सभी पदों पर आएं, लेकिन उनकी ग्रूमिंग होना और संगठन में काम करके आना जरूरी है। गहलोत ने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि मैंने भी 40 साल रगड़ाई करवाई है।
कार्यक्रम में मौजूद नेता प्रतिपक्ष गुलाबचन्द कटारिया, उपनेता राजेन्द्र राठौड़ और विपक्ष के नेताओं पर चुटकी लेते हुए गहलोत ने कहा कटारिया ने जिस तरह का प्रेजेंटेशन मंच पर दिया। ऐसा लगता ही नहीं है कि विधानसभा में उन्होंने रीट मामले मे सीबीआई जांच की मांग की हो। राजेन्द्र राठौड़ भी इतने प्यार से बैठे हुए हैं। जैसे विधानसभा में कुछ हुआ ही नहीं हो। कुछ ही मौके मिलते हैं जब पक्ष-विपक्ष साथ-साथ बैठते हैं। इसीलिए कई बार पब्लिक कह देती है कि दोनों मिले हुए हैं।
ये भी बोले गहलोत
उन्होंने वसुंधरा राजे के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि तब एसेंबली समाप्त होने पर राजे पिक्चर हॉल में सिनेमा दिखाने सभी विधायकों को ले जाती थीं। हम कहते थे कमाल का मामला है हमारे विपक्ष के लोगों को भी फिल्म दिखाने ले जा रही हैं। मैंने एतराज किया कि दिनभर तो तुम लोग लड़ते हो और फिर साथ में फिल्म देखते हो। लोग कहेंगे कि दोनों आपस में मिले हुए हो। गहलोत ने राजेन्द्र राठौड़ पर चुटकी लेते हुए कहा कि राठौड़ तो गाने के् शौकीन हैं। पहले इनका घर मेरे पड़ोस में था, तो ये जन्मदिन पर गाने गाते थे, लेकिन मुझे इनवाइट नहीं करते थे। मैंने मालूम किया तो धर्मेन्द्र राठौड़ ने कहा मैंने पता कर लिया राजेन्द्र राठौड़ की ही आवाज थी।
