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भींडर ने राशन डीलरों की पीड़ा उठाते हुए राज्यपाल से किया हस्तक्षेप का आग्रह

पानी

उदयपुर। जनता सेना प्रमुख व पूर्व विधायक रणधीर सिंह भींडर ने राशन विक्रेताओं की पीड़ा उठाते हुए राज्यपाल कलराज मिश्र को पत्र लिख सरकार को निर्देशित करने को कहा है। सरकार राशन विक्रेताओं से जुलाई 2020 से मशीन के रखरखाव पेटे 5.21 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती कर रही थी , उक्त कटौती को राशन विक्रेता संघ ने हाई कोर्ट में चुनोती दी थी जिस पर 10 जनवरी को कोर्ट ने इस कटौती पर रोक लगा दी। भींडर ने अब तक की कटौती को राशन डीलरों को वापस करने तथा भविष्य में ऐसी कटौती ना करने के लिए सरकार को पाबंद करने का ही विशेष रूप से अनुरोध राज्यपाल से किया है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि जब ये मशीने वसुंधरा राजे सरकार के समय राशन विक्रेताओं को दी गई थी तब किसी तरह का मेंटिनेंस चार्ज का उल्लेख नहीं था, लेकिन 2018 में शासन की बागडोर संभालने वाली गहलोत सरकार ने 14.7.2020 से एक आदेश द्वारा राशन डीलरों से मशीनों के मेन्टेनेन्स के नाम से 5.21 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती शुरू कर दी गई। राशन नियोजक संघ ने कई बार उच्च अधिकारियों व सरकार के नुमाइंदों तक यह बात पहुँचाई कि राजस्थान की पिछली वसुन्धरा राजे की सरकार में इस तरह की कोई कटौती नहीं की जाती थी। जब 2.05.2017 को लाइसेंस जारी किया गया तब भी ऐसा कोई बिन्दु लाइसेंस में नहीं डाला गया था तो अब इस सरकार में ऐसा क्यों किया रहा है। परन्तु सरकार पर इन दलीलों का कोई असर नहीं हुआ व कटौती जारी रही।

थक हार कर संघ ने राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ली। मशीन मेंटेनेंस के नाम से जो सरकार द्वारा 5.21 पैसे की कटौती की जा रही थी उसके खिलाफ राजस्थान राज्य अधिकृत राशन नियोजक संघ सिरोही ने राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में एक याचिका दायर की थी जिसे 10.01.2022 को माननीय न्यायालय द्वारा संगठन के हित में फैसला देते हुए 5.21 पैसे की कटौती पर रोक लगा दी है। उन्होंने आरोप लगाया किराज्य सरकार ने बग़ैर सोचे समझे राशन विक्रेताओं को परेशान करने के लिहाज़ से यह आदेश जारी किया था जबकि ये विक्रेता निचले स्तर तक राशन पहुँचाने का कार्य सुगमता से बहुत कम कमीशन पर करते है। इस आदेश पर रोक तो माननीय उच्च न्यायालय ने लगा दी व अब यह वसूली बन्द हो जायेगी, लेकिन राज्यपाल राज्य सरकार को निर्देशित करें कि जितनी राशि विभाग ने अब तक काटी है वह वापस इन राशन डीलरों को लौटाई जाये व आगे ऐसा कोई आदेश सरकार नहीं निकाले।

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