नेट-थियेट पर ग़ज़ल के सुरों से सजी शाम

जयपुर। नेट-थियेट कार्यक्रमों की श्रृंखला में ग़ज़ल गायकी में राष्ट्रीय छात्रवृत्ति से सम्मानित युवा गायक हिरेन्द्र कुमार भट्ट ने मशहूर शायरों की गज़लों और नज़मों को अनेक रागों में पेश कर दर्शकों का दिल जीत लिया। नेट-थियेट के राजेन्द्र शर्मा राजू ने बताया कि भट्ट ने शायर शकील बदायनी की ग़ज़ल बना बना के तमन्ना मिटाई जाती है को अपनी पुरकशिश आवाज़ से सजाया।

भट्ट शायर खलील मारून की ग़ज़ल फिर ना पाओगे ठिकाना कोई के बाद बशीर बद्र की गजल मिल भी जाते है तो वो पहचानते नही और ओ मेरे बच्चे आ गए शायर हसन कमाल की मशहूर ग़ज़ल क्या बताएं क्या हो गया मेरा सनम बेवफा हो गया अंत में हसरत जयपुरी की ग़ज़ल सजाएं खूब मिली उनसे दिल लगाने की सुनाई तो दर्शक वाह-वाह कर उठे।

इनके साथ मशहूर वॉयलिन वादक गुलजार हुसैन ने वॉयलिन के सुरों से ग़ज़लों में मिठास घोल दी। गिटार पर बिलाल हुसैन और तबले पर मेराज हुसैन ने सधी हुई संगत से ग़ज़ल की इस महफिल को सुरमयी बना दिया। कैमरा मनोज स्वामी, प्रकाश जितेन्द्र शर्मा, मंच सज्जा अंकित शर्मा नोनू का रहा।

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