टेंकरों, हैंडपंप और नए ट्यूबवैल खुदाई के कंटिंजेंसी प्लान की सख्ती से पालना के साथ ही पेयजल आपूर्ति के लिए फील्ड अधिकारी रहे चाकचौबंद – एसीएस डॉ. अग्रवाल

  • 4 लाख 1637 हैंडपंप कार्यरत, 1267 नए हैंडपंप लगभग तैयार
  • राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष स्थापित, प्राप्त अभाव अभियोगों की वरिष्ठ अधिकारी करेंगे मोनेटरिंग
  • तत्काल आकस्मिक जरुरतों की पूर्ति के लिए जिला कलक्टरों को 50-50 लाख रु.

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जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव पीएचईडी, माइंस एवं पेट्रोलियम डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि राज्य में पेयजल आपूर्ति के लिए जलदाय विभाग द्वारा कंटिंजेंसी प्लान की सख्ती से पालना सुनिश्चित की जाएगी। राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा के साथ ही फील्ड अधिकारियों को चाकचोबंद रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों को पेयजल आपूर्ति हमारी प्राथमिकता है और इसके लिए राज्य सरकार गंभीर है। राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष की स्थापना करते हुए नियमित रुप से उच्च स्तरीय मोनेटरिंग सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही जिला कलक्टरों को 50-50 लाख रुपए का अतिरिक्त बजट आंवटन किया गया है जिससे पेयजल वितरण में आने वाली आकस्मिक दिक्कतों को तत्काल दूर कर निर्बाध पेयजल आपूर्ति बनाई रखी जा सके।

एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल सोमवार को सचिवालय में जलदाय विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ले रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 1904 टेंकरों के माध्यम से प्रतिदिन औसतन 6654 ट्रिप प्रतिदिन कर पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें 43 शहरों में 429 टेंकरों द्वारा 3033 ट्रिप प्रतिदिन और 4142 गांव ढ़ाणियों मेें 975 टेंकरों के माध्यम से 3621 ट्रिप प्रतिदिन कर पेयजल की आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने आवश्यकता के अनुसार और टेंकर उपलब्ध कराने के निर्देश देने के साथ ही नागरिकों को मांग व आवश्यकता के अनुसार दूरदराज के इलाकों में टेंकरों से पेयजल की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश दिए।

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शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हमारी प्राथमिकता

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि राज्य 4 लाख 68 हजार 772 हैंडपंप लगे हुए हैं इनमें से 19791 हैंडपंप के खराब होने की विभाग के पास शिकायत प्राप्त हुई है जिसमें से 18903 हैंडपंपोें को ठीक करा दिया गया है। केवल 888 हैंडपंप ठीक करवाए जाने हैं जिन्हें शीघ्र ठीक कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में 3686 नए हैंडपंप लगाए जा रहे हैं जिसमें से भी 1267 हैंडपंप लगभग तैयार कर करीब 700 नए हैंडपंप चालू कर दिए गए हैं और शेष तैयार हैंडपंपों को इस पखवाड़े के अंत तक चालू करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही विभाग द्वारा 909 नए ट्यूबवैल खुदवाये जा रहे हैं जिसमें से 300 ट्यूबवैलों से पेयजल वितरण शुरु कर दिया गया हैं और शेष 600 ट्यूबवैलों से भी इस माह के दूसरे पखवाड़े तक पेयजल वितरण आरंभ करने की आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने को कहा गया है।

एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने फील्ड अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे पेयजल की उपलब्धता और वितरण अपने क्षेत्र में नियमित दौरा कर सुनिश्चित करें और पानी की लीकेज की स्थिति में तत्काल ठीक कराने के साथ ही अन्य समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान कराएं। उन्होेंने बताया कि शुद्ध पेयजल की आपूर्ति हमारी प्राथमिकता है।

राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष स्थापित

जलदाय विभाग द्वारा जयपुर में राज्य स्तरीय नियंत्रण कक्ष की स्थापना की है। यह नियंत्रण कक्ष 24 घंटें काम करेगा। उन्होेंने बताया कि नियंत्रण कक्ष के फोन नंबर 2222585 पर प्राप्त अभाव अभियोगों की वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा नियमित मोनेटरिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि हमारा उद्देश्य लोगों के अभाव अभियोगों का युक्तिसंगत हल निकालना व पेयजल की आपूर्ति बनाए रखना है। संयुक्त सचिव जलदाय प्रताप सिंह ने बताया कि विभाग द्वारा कंटिंजेंसी प्लान क्रियान्विति की नियमित समीक्षा की जा रही है।

बैठक में मुख्य अभियंता अरबन सीएम चौहान, मुख्य अभियंता स्पेशल प्रोजेक्टस डीके गौड़, मुख्य अभियंता टीएम संदीप शर्मा, मुख्य अभियंता राकेश लुहाडिया, मुख्य अभियंता गुणवत्ता नियंत्रण केडी गुप्ता अतिरिक्त मुख्य अभियंता ग्रामीण देवराज सोलंकी, ओएसडी शुभांशु दीक्षित ने विस्तार से जानकारी दी।

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