माइनर मिनरल की सभी पर्यावरणीय स्वीकृतियां अब स्टेट लेबल एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी द्वारा होगी जारी – एसीएस माइंस डॉ. अग्रवाल

  • माइनर एवं मेजर मिनरल की पर्यावरणीय क्लीयरेंस प्रक्रिया का सरलीकरण
  • 250 हैक्टेयर क्षेत्र तक के मेजर मिनरल्स की भी एसईआईएए स्तर पर ही पर्यावरणीय क्लीयरेंस
  • बजरी समस्या के समाधान में भी मिलेगी बड़ी राहत

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माइनर मिनरल

जयपुर। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस, पेट्रोलियम, जलदाय एवं भूजल डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया है कि अब अप्रधान खनिजों (माइनर मिनरल) के खनन के संबंध में सभी तरह की पर्यावरणीय स्वीकृतियां स्टेट लेबल एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी (एसईआईएए) के स्तर पर जारी होंगी। वहीं प्रधान खनिजों (मेजर मिनरल) के क्षेत्र में भी 250 हैक्टेयर क्षेत्र तक के खनन पट्टों में खनन के लिए भी एसईआईएए के स्तर पर ही पर्यावरणीय क्लीयरेंस जारी हो सकेगी। उन्होंने बताया कि इस संबंध में केन्द्र सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर आवश्यक प्रावधान कर दिए हैं।

एसीएस डॉ. अग्रवाल ने बताया कि नए प्रावधानों से प्रदेश में बजरी की समस्या के समाधान में भी बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि बजरी माइरन मिनरल्स में आती है और अब बजरी लीजधारकों व भविष्य में बजरी के खनन पट्टों के लिए स्टेट लेबल एनवायरमेंट इंपेक्ट एसेसमेंट ऑथोरिटी से ही पर्यावरणीय क्लीयरेंस मिल सकेगी। एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि माइनर मिनरल्स में ग्रेनाइट, जिप्सम, मारबल, मेसेनरी स्टोन, क्वार्टज, फैल्सपार, सोपस्टोन, डोलोमाइट, सिलिका सेंड आदि आते हैं। वहीं मेजर मिनरल्य में सीमेंट ग्रेड लाईमस्टोन, आयरन ओरे, लेड़, जिंक, कॉपर, मैगनीज आदि आदि मिनरल्स आते हैं।

माइनर मिनरल

डॉ. अग्रवाल ने बताया कि इन प्रावधानों से एक मोटे अनुमान के अनुसार प्रदेश के 20 हजार से अधिक खान धारकों को राहत मिलेगी वहीं भविष्य में जारी होने वाले खनन पट्टों के लिए भी पर्यावरणीय क्लीयरेंस एसईआईएए से जारी हो सकेगी। उन्होंने बताया कि इससे समय की बचत होने के साथ ही प्रक्रिया में आसानी हो सकेगी।

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