Headlines

11 हजार नर्सों और महिला हेल्थ वर्कर्स को राजनीति मार गई, पहले पदस्थापन किया, फिर तीसरी लहर के नाम पर रोका

हेल्थ वर्कर्स File Photo

जयपुर। राज्य में चल रही राजनीतिक उथल-पुथल का असर विभिन्न सरकारी कामकाजोंं व सेवाओं पर भी पड़ रहा हैंं। इस हलचल का सबसे बड़ा असर प्रदेश के नर्सिंग स्टाफ को भुगतना पड़ा। 11 हजार नर्सेज और महिला हेल्थ वर्कर्स का पहले तो 30 जुलाई को पदस्थापन कर दिया गया। उनको यह आदेशित किया गया कि कोविड-19 की परिस्थितियों को देखते हुए ऑनलाइन विकल्प पत्र के आधार पर रिक्त पदों पर पदस्थापन किया गया है, लेकिन 2 अगस्त को तीसरी लहर के नाम पर ही इन पदस्थापनों को रोक दिया गया। पदस्थापन रोकने में ये भी दलील दी गई कि ऑन विकल्प भरने का अनुभव नहीं होने के कारण कई अभ्यर्थी सही विकल्प नहीं भर सके। प्रदेश में हो रही बारिश से बाधा का भी हवाला दिया गया पर इस बीच पदस्थापन आदेश जारी होते ही जिन अभ्यर्थियों ने रिलिव होकर पदस्थापन में की गई पोस्टिंग के आधार पर जॉइन कर लिया।

WhatsApp Image 2021 08 06 at 1.32.46 PM

नए स्थान पर जॉइन करने वाले संकट में

जिन अभ्यर्थियों ने नए स्थान पर पदस्थापन के अनुसार ज्वाइन किया उसके लिए पदस्थापन रोकना मुसीबत बन गया। ये अभ्यर्थी इधर के रहे ना उधर के। पदस्थापन रोकने से प्रभावित अभ्यर्थियों ने स्वास्थ्य निदेशालय पर प्रदर्शन भी किया तथा अतिरिक्त निदेशक नर्सेज मुकुल शर्मा व स्वास्थ्य सचिव सिद्धार्थ महाजन व मुख्यसचिव तक अपनी गुहार लगाई, लेकिन वहां से एक ही जवाब मिला कि ये मुख्यमंत्री के स्तर पर रोके गए हैं। वे इस मामले में असहय हैं। जिन्होंंने जॉइन कर ली उनके बारे में विचार करने का आश्वासन दे केवल प्रार्थना पत्र ले लिए।

झगड़ा नए अभ्यर्थियों को मनमाफिक पदस्थापन न मिलने का

पीडि़त नर्सेज अभ्यर्थियों की माने तो यह झगड़ा असल में पहले से संविदा पर काम कर रहे नर्सेज और फे्रस भर्ती हुए अभ्यर्थियों के बीच का हैं। सरकार ने अप्रेल 2020 में ही पोस्टिंग दे दी थी फिर पदस्थापन के लिए यह तीसरी बार कॉउन्सिलिंग की गई। चूंकि संविदा वाले पहले से सेवा में थे अत: वे मैरिट में सबसे ऊपर आ गए। पदस्थापन में पहले विकलांग, विधवा, परित्यक्ता तथा पति-पत्नी को निकट स्थान का ध्यान रखा गया, उसके बाद मैरिट के आधार पर जिले व सीट आवंटित की गई। ऐसे में नए अभ्यर्थी इच्छित स्थान व जिलों में आ नहीं सके। इच्छित स्थान पर नहीं आने वालों ने अपने राजनैतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए विधायकों व अन्य जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सीएम तक अपनी बात रख इन पदस्थापनों को रूकवा दिया। चिकित्सा मंत्री के भी जयपुर से बाहर होने के कारण ये मामले लटक कर रह गया।

WhatsApp Image 2021 08 06 at 1.33.15 PM

संघर्ष समिति ने चेताया

राजस्थान नर्सेज भर्ती 2018 संघर्ष समिति के अध्यक्ष पवन कुमार मीणा, प्रदेश संयोजक जितेन्द्र कटारा, समिति अध्यक्ष सोमसिंह मीणा व जयपुर जिला संयोजक कमलेश गुर्जर का कहना है कि राजनैतिक दखंलदाजी के कारण नियम कायदों के अनुसार हुए पदस्थापन को गलत ढंग से रोका गया हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कुछ सौ नए अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने के लिए योग्य नर्सेज को प्रताडि़त करने का काम किया गया हैं। अगर सरकार ने इसका समाधान नहीं निकाला तो फिर से सड़कों पर उतरने को हमें मजबूर होना पड़ेगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *