जयपुर: विधानसभा में राजकीय उपक्रम समिति का सभापति बनाये जाने के बाद आज बाड़मेर के गुढ़ामलानी से विधायक हेमाराम चौधरी बोले कि वे अपने इस्तीफे को वापस नहीं लेंगे। वे जल्द ही विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से मुलाकात करेंगे। चौधरी पायलट समर्थक माने जाते है और वे सरकार के कामकाज के तरीको से खफा है। अपने क्षेत्र में विकास को मुद्दा बनाकर ही उन्होंने इस्तफ़ा दिया है। हेमाराम चौधरी ने 18 मई को इस्तीफा दिया था। तब से अब तक उनके इस्तीफे पर कोई फैसला नहीं हुआ है। विधानसभा से उनके नाम एक पत्र गया था।जिसमे कहा गया था कोरोनाकाल के बाद विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के समक्ष पेश होने के लिए उन्हें सूचित कर दिया जायेगा। लेकिन वो तिथि अभी तक नहीं आयी।
डोटासरा और माकन ने भी उनसे मंत्रणा की
इस बीच में उन्हें मनाने की भी कोशिश की गयी थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने भी उनसे लम्बी मंत्रणा की थी। राजस्थान प्रभारी अजय माकन का भी उनके पास फ़ोन आया था। वे जिस पायलट गुट से आते है उनके नेता सचिन पायलट ने भी उनसे इस्तफ़ा नहीं देना का आग्रह किया था। हेमाराम के इस्तीफे के दबाव के बाद उनके गुढ़ामलानी क्षेत्र में सरकार की और से कई विकास कार्य भी स्वीकृत किये गए थे। हेमाराम कुछ नरम पड़े तो लगा था कि वे इस्तीफा वापस लेने पर मान जायेगे लेकिन उनके इस नए स्टेटमेंट ने फिर से बखेड़ा खड़ा कर दिया है।
जब तक इस्तीफा स्वीकृत नहीं होता, अपना विधायक कर्तव्य निभाऊंगा
हाल ही में हेमाराम को उपक्रम समिति का सभापति बनाए जाने के बाद ये तो साफ हो गया है कि राजस्थान सरकार चौधरी के इस्तीफे को स्वीकार करने के मूड में नहीं है। वही पर हेमाराम ने कहा कि मुझे उपक्रम समिति का अध्यक्ष बनाया गया है इसके बारे में मुझसे पूछा नही गया है। मैने 18 मई को विधायक पद से इस्तीफा दिया था। अभी तक मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। मैं भी अपना इस्तीफा वापस नहीं लूंगा। चौधरी ने कहा कि जब तक मेरा इस्तीफा स्वीकार नहीं हो जाता तब तक मैं अपने विधायक पद के कर्तव्यों का बखूबी पालन करता रहुंगा।
जल्द ही मिलेंगे जोशी से
हेमाराम चौधरी ने कहा है कि वे विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी से मिलने विधानसभा भी गए थे किंतु कोरोना की वजह से जोशी से मुलाकात नहीं हो पाई। उन्होने कहा कि वे जल्द ही जब भी जोशी समय देंगे तब सीपी जोशी से मिलेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे। उन्होने कहा कि बजट सत्र में विधानसभा अध्यक्ष को ये अधिकार दे दिया गया था कि वे जल्द से जल्द कमेटियों का गठन करे और उनका सभापति बनाए।
