वित्त वर्ष 2021-22 में नवीकरणीय ऊर्जा की नई क्षमता बढ़ोतरी दोगुना रही: सीईईडब्ल्यू-सीईएफ

-मार्च 2022 में बिजली की अधिकतम मांग आपूर्ति में 1.4 गीगावाट की कमी रही, जो मार्च 2021 में सिर्फ 0.5 गीगावाट थी
-वित्त वर्ष 2021-22 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में 230 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई, जिसकी प्रमुख वजह सरकारी प्रोत्साहन और पेट्रोल की महंगाई रही

0
99
वित्त वर्ष 2021-22 में नवीकरणीय ऊर्जा की नई क्षमता बढ़ोतरी दोगुना रही: सीईईडब्ल्यू-सीईएफ

नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2021-22 में, गैर-पनबिजली नवीकरणीय ऊर्जा की नई क्षमता 15.5 गीगावाट रही, जबकि पिछले वित्त वर्ष में महज 7.7 गीगावाट क्षमता स्थापित की गई थी। यह बात काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वाटर-सेंटर फॉर एनर्जी फाइनेंस (सीईईडब्ल्यू-सीईएफ) की मार्केट हैंडबुक के नए संस्करण में सामने आई है, जिसे आज जारी किया गया है। वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान, कुल कोयला आधारित बिजली उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 33 प्रतिशत घट गई। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2021-22 में बिजली की अधिकतम मांग (पीक पॉवर डिमांड) अभूतपूर्व ऊंचाई तक पहुंच गई, मार्च 2022 में बिजली की अधिकतम मांग आपूर्ति में 1.4 गीगावाट की कमी रही, जो मार्च 2021 में सिर्फ 0.5 गीगावाट थी।

वित्त वर्ष 2021-22 के अंत में, भारत की अक्षय ऊर्जा उत्पादन क्षमता (पनबिजली सहित) 150 गीगावाट रही। यह 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन से 500 गीगावाट बिजली उत्पादन क्षमता स्थापित करने के लक्ष्य से काफी दूर है और 2030 के लक्ष्य को पाने के लिए सालाना लगभग 40 गीगावाट क्षमता स्थापित करने की जरूरत होगी।

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ के डायरेक्टर गगन सिद्धू ने कहा, “वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में 2021-22 में नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता बढ़ोतरी में 100% से ज्यादा उछाल अच्छा है। लेकिन हाल में बिजली सेक्टर पर आए दबाव के कारण कई राज्यों को बिजली कटौती की आशंकाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसने ऊर्जा जरूरतों में तापीय बिजली की भविष्य में भी केंद्रीय भूमिका बनी रहने के तथ्य को रेखांकित किया है। हालांकि, नवीकरणीय ऊर्जा की क्षमता में बढ़ोतरी तापीय ऊर्जा की सप्लाई संबंधी समस्याओं को काफी हद तक दूर कर सकती है, लेकिन इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा की एक बड़ी कमी- इंटरमिटेंसी (प्राकृतिक कारणों से आने वाला व्यवधान, जैसे धूप न होने पर सौर ऊर्जा का उत्पादन रुक जाना) को दूर करने के लिए बड़े पैमाने पर बैटरी स्टोरेज स्थापित करने की आवश्यकता है।

हाइब्रिड और चौबीसों घंटे (आर-टी-सी) जैसे बिजली खरीद के नए प्रारूप भी इंटरमिटेंसी से कुछ हद तक सुरक्षा देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि वित्त वर्ष 2021-22 में 17.5 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता की नीलामी हुई, जिसमें से 4.3 गीगावाट या एक-चौथाई हिस्सा इन नए खरीद प्रारूपों के तहत था । हम उम्मीद कर सकते हैं कि आगे यह हिस्सेदारी और बढ़ेगी, क्योंकि यह लगता है कि डिस्कॉम नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में इंटरमिटेंसी की समस्या से निपटने के लिए डेवलपर्स की ओर रुख कर रहे हैं।”

कुल मिलाकर, कुल बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ोतरी के लिहाज से वित्त वर्ष 2021-22 में जोड़ी गई कुल 17.3 गीगावाट क्षमता में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी 89 प्रतिशत से थोड़ी अधिक रही, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 63 प्रतिशत से थोड़ी अधिक थी। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2021-22 बढ़ी कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में सौर ऊर्जा का हिस्सा 90 प्रतिशत था, जिसमें स्थापित रूफटॉप सोलर क्षमता की हिस्सेदारी 21 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 2.3 गीगावाट रही।

कच्चे माल की लागत बढ़ने और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं के कारण सोलर पीवी मॉड्यूल की लागत बढ़ी। सोलर पीवी मॉड्यूल की ऊंची लागत और आसन्न (इमिनन्ट) बेसिक कस्टम ड्यूटी लगने के कारण वित्त वर्ष 2021-22 में सौर ऊर्जा उत्पादित बिजली की दर 2.14 रुपये/किलोवाट रही, जो वित्त वर्ष 2020-21 में 1.99 रुपये/किलोवाट थी। इस साल बजट में केंद्र सरकार ने सोलर सेल और मॉड्यूल के घरेलू निर्माण को बढ़ाने के लिए 19 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त प्रोत्साहन देने की घोषणा की है।

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ हैंडबुक बताती है कि इस अवधि में बिजली वितरण कंपनियों का कुल बकाया पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 32 प्रतिशत बढ़कर 1.28 लाख करोड़ रुपये हो गया।

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ हैंडबुक के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री 230 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी के साथ 4.2 लाख यूनिट पहुंच गई, जो पिछले वित्त वर्ष में 1.2 लाख यूनिट थी। इतना ही नहीं, वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान बिके कुल वाहनों में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 2.6 प्रतिशत से ज्यादा रही, जो पिछले वित्त वर्ष में एक प्रतिशत से भी कम थी। फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ इलेक्ट्रिक एंड हाइब्रिड व्हीकल (फेम-II) योजना के तहत सरकारी प्रोत्साहन के साथ-साथ पेट्रोल की कीमत में बढ़ोतरी और नए मॉडल्स की लॉन्चिंग ने शून्य-उत्सर्जन वाले वाहनों, विशेष रूप से इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन, की बिक्री को बढ़ाने में अहम योगदान दिया। केंद्रीय बजट 2022-23 में फेम-II योजना के लिए आवंटित धनराशि बढ़कर 2,908 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2021-22 में 800 करोड़ रुपये थी।

सीईईडब्ल्यू-सीईएफ में रिसर्च एनालिस्ट रुचिता शाह ने कहा, “राष्ट्रीय स्तर पर, मार्च 2022 में इलेक्ट्रिक वाहन कुल वाहन बिक्री में चार प्रतिशत की हिस्सेदारी को पार कर गए। ये आंकड़े बताते हैं कि यह बदलाव इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की तरफ बहुत ही ज्यादा झुका हुआ है। चूंकि, इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों की चार्जिंग के लिए बहुत ही कुशल ढांचे की जरूरत नहीं पड़ती है, इसलिए इस बदलाव में छोटे कस्बों/शहरों की भागीदारी अच्छी रहने की संभावना है। ”

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here