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कश्मीरी पंडितों का मामला हो या आतंकवाद का हमेशा अहम भूमिका में रहे जगमोहन

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नई दिल्ली: पूर्व केंद्रीय मंत्री और जम्मू कश्मीर के राज्यपाल रहे जगमोहन का 93 वर्ष की आयु में सोमवार को निधन हो गया। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई नेताओं ने मंगलवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी।

पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘जगमोहन जी का निधन हमारे राष्ट्र के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है। वह एक कुशल प्रशासक और प्रतिष्ठित विद्वान थे। उन्होंने देश की बेहतरी के लिए हमेशा काम किया। बतौर मंत्री अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई नवप्रवर्तक नीतियां बनाई। परिवार के सदस्यों और प्रशंसकों के साथ मेरी संवेदनाएं हैं।’

 

जगमोहन ने बतौर नौकरशाह अपने करियर की शुरुआत की थी और उन्हें सख्त और दक्ष प्रशासक के रूप में देखा जाता था। उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में भी काम किया। वर्ष 1984 में उन्हें जम्मू एवं कश्मीर का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। वह जम्मू कश्मीर के पांचवेंं राज्यपाल थे। उनका पूरा नाम जगमोहन मल्होत्रा था।

कश्मीरी पंडितों का मामला हो या आतंकवाद का निभाई अहम भूमिका

आतंकवाद का सामना करने वाले जम्मू कश्मीर में पूर्व राज्यपाल के तौर पर जगमोहन ने अनेक सख्त फैसले लिए। घाटी में कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार का मामला हो या आतंक से बचाव में रणनीति का मुद्दा जगमोहन कभी पीछे नहीं रहे। उन्होंने आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन की रणनीति बनाई। साथ ही वहां होने वाले कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार को रोकने का भी पूरा प्रयास किया था।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी उनके निधन पर शोक जताया और कहा कि जम्मू एवं कश्मीर के राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल को हमेशा याद किया जाएगा।

 

 

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