अमेरिकन्स उठा सकेंगे अब भारतीय आमों का स्वाद और लुफ़्त

@ गोपेंद्र नाथ भट्ट

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नई दिल्ली। अमेरिका के लोग अब अधिक संख्या में भारत के रसीले आमों का स्वाद और लुफ़्त उठा सकेंगे। अमेरिका द्वारा 2020 से भारतीय आमों के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। केंद्र सरकार ने नए सीजन में अमेरिका के लिए भारतीय आमों के निर्यात के लिए यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) से मंजूरी प्राप्त कर ली है। इससे अमेरिका के उपभोक्ता अब भारत के उत्कृष्ट गुणवत्ता वाले आम प्राप्त कर सकेंगे। परस्पर समझौते के हिस्से के रूप में, भारत मार्च के बाद से आमों की अल्फांसों किस्म के साथ आरंभ करते हुए अमेरिका में आमों का निर्यात करने में सक्षम हो सकेगा।

कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने कहा कि यह उत्तर तथा पूर्व भारत के क्षेत्रों से उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल के लंगड़ा, चौसा, दसहरी, फजली आदि आमों की अन्य स्वादिष्ट किस्मों के निर्यात के लिए भी अवसर उपलब्ध कराएगा। इसी प्रकार अनार का निर्यात अप्रैल, 2022 से आरंभ होगा। अमेरिका से चेरी और अल्फाल्फा सूखी घास का आयात अप्रैल, 2022 से आरंभ होगा।

विगत 23 नवंबर, 2021 को आयोजित 12वीं-अमेरिकी व्यापार नीति फोरम (टीपीएफ) की बैठक के अनुसार कृषि तथा किसान कल्याण विभाग और यूनाइटेड स्टेट्स डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) ने 2 बनाम 2 कृषि बाजार पहुंच मुद्दों को कार्यान्वित करने के लिए एक संरचना समझौते पर हस्ताक्षर किया है। इस समझौते के तहत, भारत और अमेरिका भारत के आमों तथा अनारों के अमेरिका को निर्यात के लिए विकिरण तथा अमेरिका से चेरी और अल्फाल्फा सूखी घास (हे) के आयात पर संयुक्त प्रोटोकॉल का अनुसरण करेंगे।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में भारतीय आमों की व्यापक स्वीकृति और उपभोक्ता वरीयता है तथा भारत ने 2017-18 में अमेरिका को 800 मीट्रिक टन (एमटी) आमो का निर्यात किया था और इन फलों का निर्यात मूल्य 2.75 मिलियन डॉलर था। इसी प्रकार, 2018-19 में अमेरिका को 3.63 मिलियन डॉलर के बराबर के 951 एमटी आमों का निर्यात किया गया था जबकि वित्त वर्ष 2019-20 में अमेरिका को 4.35 मिलियन डॉलर के बराबर के 1,095 एमटी आमों का निर्यात किया गया था। आकलनों के अनुसार, 2022 में आमों का निर्यात 2019-20 के आंकडों की तुलना में अधिक हो सकता है। यूएसडीए की मंजूरी महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश तथा तेलंगाना जैसे पारंपरिक आम उगाए जाने  वाले क्षेत्रों से निर्यात के लिए रास्ता प्रशस्त कर देगी।

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