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Uttar Pradesh का एक गांव जहां कहर बनकर टूटा कोरोना

A village in Uttar Pradesh where corona broke into havoc

उत्तर प्रदेश : कोरोना महामारी देश के कई हिस्सों में कहर बनकर सुनामी की तरह फ़ैल रही है। देश के कई गांवों में पिछले एक महीने से मौत का सिलसिला चल रहा है। अनेक मामलों में कारण कोरोना नहीं माना जा रहा है, मगर मौत की यह रफ्तार डरा रही है। कुछ ऐसे ही हालात उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के रायबरेली के सुल्तानपुर खेड़ा गांव के है।

सुल्तानपुर खेड़ा गांव में कोरोना जैसे लक्षणों के चलते एक हफ्ते में एक या दो नहीं, बल्कि 17 लोगों ने दम तोड़ दिया है।अधिकारी मौन हैं, ना ही उनकी टेस्टिंग हुई और ना ही सही इलाज मिल पाया। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी यहां से सांसद हैं और डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा यहां के प्रभारी मंत्री हैं।

प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार गाँव

ये कहानी रायबरेली के छोटे से गांव सुल्तानपुर खेड़ाकी है। जिसकी आबादी 2000 लोगों की है, यहां लगभग 500 परिवार रहते हैं। बीते कुछ दिनों से हर तरफ मौत का मंजर दिखाई दे रहा है। हर घर में आंसू और मातम पसरा हुआ है। बीते दिनों में यहां पर 17 मौतें हो चुकी है, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार यह गांव आज भी अपने किसी भगवान रूपी नेता का इंतजार कर रहा है।

डर का माहौल

गांव में कोरोना लक्षण जैसे जुकाम और बुखार से इंफेक्शन की शुरुआत होती है और सांस लेने में तकलीफ के बाद मौत हो जाती है। गांव में डर का माहौल है, 17 मौतें होने के बावजूद जिला प्रशासन ने चुप्पी साध रखीं है। ना कोई टीम गांव पहुंची है, ना सैनिटाइजेशन हुआ है, ना फागिंग और ना ही साफ सफाई का काम हुआ है।

सरकार ओर प्रशासन दोनों लापरवाह

गांव वालों की माने तो सरकार और प्रशासन दोनों ही पूरे मामले में लापरवाह रहे है। गांव की इतनी भयावह तस्वीर के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई सुनने वाला नहीं है। इतना ही कह सकते है समय रहते सरकार न जागी तो देश में हर तरफ मौत का मंजर दिखाई देगा।

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