पटना: 27 अक्टूबर 2013 को पटना के मशहूर गांधी मैदान में हुए बम विस्फोट के मामले में पटना सिविल कोर्ट में NIA के विशेष न्यायाधीश गुरविंदर सिंह मल्होत्रा ने सीरियल बम ब्लास्ट के सभी नौ आरोपियों को दोषी करार दिया। स्पेशल कोर्ट ने 8 साल 5 दिन बाद सोमवार यानी 1 नवंबर को सजा सुनाई। इसमें 4 को फांसी, 2 को उम्रकैद, 2 को 10 साल और 1 को 7 साल की सजा सुनाई गई।
गौरतलब है कि यह बम ब्लास्ट 27 अक्टूबर 2013 को सुबह 9 बजे से लेकर दोपहर 12:45 बजे तक बैक-टू-बैक 7 बम ब्लास्ट किए गए थे। इनमें पहला ब्लास्ट स्टेशन और बाकी 6 गांधी मैदान में किए जाते हैं। नरेंद्र मोदी जब भाषण दे रहे थे, तब भी 4 बम ब्लास्ट हुए थे। हमले में 6 लोगों की मौत हो गई थी। 89 लोग घायल हुए थे। पूरे देश में दहशत का माहौल था।
तगड़ी सुरक्षा की जानकारी हुई तो मानव बम का बदला प्लान
धमाका करने के लिए हैदर, इम्तियाज, मुजीबुल्लाह, नोमान और तारिक बस से रांची से पटना आए थे। ये सभी बाइपास पर ही उतर गए। फिर वहां से ऑटो से पटना जंक्शन और गांधी मैदान पहुंचे थे। इम्तियाज और तारिक को पटना जंक्शन के शौचालय में बम प्लांट करना था। जबकि मुजीबुल्लाह व नोमान को गांधी मैदान में। मुजीबुल्लाह ने ही गांधी मैदान में आईईडी, आलू बम और लोटस बम प्लांट किए थे। आतंकियों ने जिलेटिन की छड़ समेत अन्य विस्फोटक रांची, रायपुर और मिर्जापुर से खरीदे थे। इम्तियाज कुकर बम और हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी मानव बम बनाने में माहिर है। जब हैदर को जानकारी हुई कि नरेंद्र मोदी की सुरक्षा तगड़ी है तो मानव बम बनाने का प्लान बदल दिया गया था
