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डेल्टा+ वेरिएंट की जांच जयपुर में भी हो सकेगी, राज्य स्तर पर राजस्थान देश का पहला राज्य

जयपुर: मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर एसएमएस मेडिकल कॉलेज में जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा प्रारम्भ कर दी गई है। राज्य स्तर पर टोटल जिनोम सिक्वेन्सिंग की सुविधा उपलब्ध होने की दृष्टि से राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। जयपुर में प्रदेश के सबसे बड़े SMS मेडिकल कॉलेज में यह सुविधा शुरू की है। वर्तमान में इस मशीन की क्षमता 20 सैंपल डेली जांचने की है। इसे आने वाले समय में बढ़ाकर 80 तक करने की योजना है। इसे तीसरी लहर की तैयारियों के रूप में देखा जा रहा है।

नए स्ट्रेन का पता समय पर लग जाएगा 

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने बताया कि कोविड-19 वायरस के बदले नेचर और उस पर मॉनिटरिंग के लिए यह सुविधा शुरू कराई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तकनीक से ये लाभ होगा कि कोरोना वायरस के बदलते स्वरूप (नए स्ट्रेन) का पता समय पर लग जाएगा और उसके अनुसार सरकार आगे की तैयारियां करके उसके बचाव पर काम कर सकती है। अभी कोरोना के स्ट्रेन की जांच के लिए सैंपल दिल्ली भेजने पड़ते हैं। रिपोर्ट आने में काफी वक्त लगता है।

जिनोम सिक्वेन्सिंग की व्यवस्था

चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के मुताबिक, SMS मेडिकल कॉलेज में करीब 1 करोड़ रुपए की लागत से जिनोम सिक्वेन्सिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। SMS मेडिकल कॉलेज में लगाई मशीन पर सैंपलिंग का काम इसी महीने से शुरू किया गया है। इस मशीन की क्षमता प्रतिदिन 20 सैंपल जांच करने की है। इसकी क्षमता को बढ़ाकर प्रतिदिन 80 सैंपल की जांच की जाएगी। चिकित्सा मंत्री ने बताया कि अब तक कोविड-19 के करीब 100 सैंपल की जिनोम सिक्वेन्सिंग हुई है। इनमें लगभग 90 प्रतिशत डेल्टा वैरिएंट के केस हैं। शेष 10 प्रतिशत कोविड-19 का बी 1.1 वैरिएंट मिले हैं।

हालांकि, इस वैरिएंट पर अभी शोध चल रहा है कि यह कितना घातक है। अगर किसी व्यक्ति के वैक्सीन की दोनों डोज लग भी चुकी है, तो भी वह कोविड नियमों का सख्ती से पालन करें और मास्क जरूर लगाएं।

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