जयपुर : राजस्थान में कोरोना की दूसरी लहर के घातक होने के पीछे वायरस का यूके स्ट्रैन (UK Strain) है। जीनोम सिक्वेंसिंग से राजस्थान में यूके स्ट्रैन (UK Strain) मिलने की पुष्टि हुई है। स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि अभी दो तीन दिन पहले ही रिपोर्ट आई उसमें पता चला कि राजस्थान में यूके का स्ट्रैन है। जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा पूरे देश में 10 जगह है, वह भारत सरकार के नियंत्रण में हैं। सारे राज्य वहां पर रेगुलर अपने सैंपल भेजते रहते हैं। पिछले दिनों पेंडेंसी ज्यादा थी, हमने अप्रोच किया ताकि हमें स्ट्रैन का तो पता चले कि प्रदेश में कोरोना का कौन सा स्ट्रैन से पीड़ित हो रहे हैं। अभी दो तीन दिन पहले ही रिपोर्ट आई उसमें पता चला कि राजस्थान में यूके का स्ट्रैन है।
तेजी से फैलता हैं यूके स्ट्रैन
यूके स्ट्रैन तेजी से फैलता है, यही वजह है कि इस बार शहर के साथ गांवों में भी कोरोना फैल रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक 40 फीसदी केस ग्रामीण इलाकों से आ रहे हैं, कोरोना से 40 फीसदी के आसपास मौतें भी ग्रामीण इलाकों में हो रही हैं। प्रदेश में अभी 2.05 लाख एक्टिव केस हैं, 26 दिन बाद यानी 6 जून के आसपास ही प्रदेश में 4 लाख एक्टिव मरीज हो जाएंगे।
एसएमएस मेडिकल कॉलेज में शुरू होगी कोरोना की जीनोम सिक्वेंसिंग
राजस्थान सरकार ने अब राजधानी जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में जीनोम सिक्वेंसिंग शुरू करने का फैसला किया है। अब तक जीनो सिक्वेंसिंग के लिए बाहर सैंपल भेजने होते थे। केंद्र सरकार के अधीन आने वाली 10 लैब में यह सुविधा है। इस वजह से वहां रिपोर्ट आने में काफी वक्त लगता है। राजस्थान में भी यूके स्ट्रैन का पता काफी देरी से लगा। अगर स्थानीय स्तर पर जीनोम सिक्वेंसिंग की सुविधा होती तो वायरस के स्ट्रैन का पता जल्दी लग सकता था, जिससे इलाज के पैटर्न में बदलाव कर मरीजों क जान बचाने के साथ इसका फैलाव रोका जा सकता था।
स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने कहा- अब हम जीनोम सिक्वेंसिंग का काम जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज में शुरु करने का फैसला किया है। विभाग के अफसर इसकी तैयारियों में जुट गए हैं। यह सुविधा जयपुर में शुरु होने से वायरस के सिंगल, डबल या ट्रिपल म्यूटेंट होने और स्ट्रैन का पता लग जाएगा। इससे हमें लाइन ऑफ ट्रीटमेंट में मदद मिलेगी और जल्द बेहतर उपचार शुरू हो सकेगा।
