इस्लामाबाद : पाकिस्तान में इमरान खान सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ा झटका लगा है। 4 दिन चली सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव खारिज करना और नेशनल असेंबली भंग करना, दोनों काम गैरकानूनी थे। प्रधानमंत्री इमरान खान को यह अधिकार नहीं है कि वो राष्ट्रपति से संसद भंग करने को कहें। इस्लामाबाद में फौज और रेंजर्स तैनात कर दिए गए हैं। गुरुवार को अटॉर्नी जनरल खालिद जावेद खान की दलीलें सुनने के बाद चीफ जस्टिस उमर अता बंदियाल ने कहा कि ये साफ है कि डिप्टी स्पीकर का फैसला संविधान के खिलाफ है। 9 अप्रैल को सुबह 10 बजे पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी। इसके मायने ये हुए कि इमरान जिस फजीहत से बच रहे थे, वही होने को है।
सब संविधान के हिसाब से हो रहा, तो दिक्कत कहां है
राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के वकील अली जफर ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा। चीफ जस्टिस ने जफर से पूछा- अगर सब संविधान के हिसाब से ही चल रहा है तो फिर परेशानी कहां है? अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करना अनुच्छेद 95 का उल्लंघन है। अब अगर देश में चुनाव कराए गए तो इसमें अरबों रुपए का खर्च आएगा।
वहीं, इस मामले को देखते हुए सुरक्षा के दृष्टिकोण से सुप्रीम कोर्ट में कमांडोज को भी तैनात किया गया है। इससे पहले नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव खारिज होने के बाद पाकिस्तान की संसद को भी भंग कर दिया गया था और 90 दिनों के भीतर चुनाव कराने की मांग हुई थी।
