जयपुर। हिज़ाब पर कर्नाटक में शुरू हुआ विवाद नया नहीं है। यह कट्टरपंथी संगठनों की सोची समझी राष्ट्र व्यापी साजिश का एक हिस्सा है जिसकी आजमाईश कोरोना की दूसरी लहर के बाद स्कूल खुलने के साथ ही शुरू हो गई थी। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच ने चौकन्ने वाले इस षड्यंत्र का खुलासा करते हुए बताया कि राजस्थान के झुंझुनूं जिले के एक छोटे से गांव महनसर के गंगा विद्यापीठ शिक्षण संस्थान में भी अक्टूबर महीने में यह प्रयोग किया गया था।
जब स्कूल में अचानक चार-पांच मुस्लिम लड़कियां हिज़ाब पहनकर आने लगी तो प्राचार्य राजश्री शर्मा ने स्कूल यूनिफार्म में ही आने की हिदायत दी। मगर जब वे नहीं मानी तो प्राचार्य ने लड़कियों को मजबूरन घर वापिस भेज दिया। इस पर उनके अभिवावकों ने स्कूल पहुँच कर धार्मिक परम्परा का हवाला दिया तथा छात्राओं को हिजाब के साथ प्रवेश देने की मांग की और नहीं तो स्कूल छोड़ने की धमकी दी। मामला प्रबंधन तक पहुँचा तो उन्होंने समुदाय के अग्रणी जनों से बातचीत कर बड़ी क्लास की बालिकाओं को ड्रेस कोड के रंग का दुपट्टा सिर पर रखने की छूट दे दी।
मगर फिर भी बात नहीँ बनी और दूसरी मुस्लिम लड़कियां भी हिजाब पहन कर आने लगी। उनको रोकने पर अभिवावको ने बवाल खड़ा करने की कोशिश की पर स्कूल प्रबंधक वापी प्रवासी बी.के. दायमा ने कठोर निर्णय लेते हुये ड्रेस कोड के बिना प्रवेश नहीं देने का आदेश देते हुए ऐसे विद्यार्थियों को उनकी मांग पर टीसी देने को कहा। शुरू में तो करीब 50 बालिकाओं ने टीसी लेने की इच्छा जताई। मगर बाद में प्रबंधन के रुख को देखते हुए केवल 10-15 बालिकाओं ने ही इस मुद्दे पर स्कूल छोड़ कर अन्यत्र प्रवेश लिया। कुछ अभिवावक महनसर की सरकारी स्कूल में प्रवेश के लिये गये मगर वहां भी प्रधानाध्यापिका ने भी स्कूल ड्रेस में ही आने की शर्त रखी। इस तरह कट्टरपंथियों का यह प्रयोग शेखावाटी में परवान नही चढ़ पाया। दाधीच ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी राजस्थान में माहौल बिगाड़ने की कुचेष्टा की इस घटना को सार्वजनिक किया है।

