जयपुर। दौसा के किसान की जमीन को नीलाम करने के प्रकरण में राजनीति गर्मा गई है। इस घटना को लेकर सुरक्षा व्यवस्था का धता बताते हुए डॉ. किरोड़ीलाल मीणा पीड़ित किसान परिवार के साथ दंडवत करते मुख्यमंत्री निवास पर जा धमके। जहां मीणा को पुलिस ने हिरासत में ले स्टेचू सर्किल पर छोड़ा। किरोड़ी रिहा होने के बाद सीएमओ पहुंच गए और सीएम सचिव आरती डोगरा को मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। किरोड़ी ने इस मामले में उग्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है। इससे पहले पीड़ित किसान परिवार व अपने समर्थकों के साथ किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री निवास पर दंडवत करके किसानों के कर्ज माफी की मांग की। उनका कहना है कि जमीन नीलाम होने के बाद किसान का परिवार आत्महत्या करने को मजबूर है, क्योंकि परिवार के भरण पोषण का अब कोई जरिया नहीं रहा है।
आपको बता दे कि दौसा जिले के रामगढ़ पचवारा के जामुन की ढाणी के कजोड़ मीणा ने राजस्थान मरुधरा ग्रामीण बैंक से केसीसी का लोन लिया था। वर्ष 2017 के बाद किसान ने 7 लाख रुपए से अधिक का ऋण नहीं चुकाया। लोन लेने वाले किसान कजोड़ मीणा ने अक्टूबर 2021 में आत्महत्या कर ली। उसके बाद बैंक ने मृतक किसान के पुत्र राजू लाल और पप्पू लाल को कई बार नोटिस दिए,लेकिन गरीब परिवार सरकार के कर्जमाफी के इंतजार में लोन जमा नहीं करा पाया। ऐसे में रामगढ़ पचवारा एसडीएम कार्यालय की ओर से जमीन कुर्की के आदेश दिए गए।
मंगलवार को जमीन की नीलामी की प्रक्रिया की गई। किसान कजोड़ मीणा की करीब 15 बीघा 2 बिस्वा जमीन 46 लाख 51 हजार रुपए में नीलाम कर दी गई। नीलामी के बाद किसान परिवार का रो-रोकर बुरा हाल था। इस घटना का पता चलते ही डॉ. किरोड़ीलाल मीणा लालसोट पहुंच गए और किसान को लेकर जिला कलेक्टर के पास जा धमके। जैसे ही लालसोट से विधायक व गहलोत सरकार में मंत्री परसादीलाल सक्रिय हुए और एसडीएम को कह नीलामी को निरस्त करवाया। किसान की भूमि नीलामी का पता चला तो किसान नेता राकेश टिकैत भी देर रात पहुंच गए। टिकैत ने भी नीलामी प्रकरण को लेकर सरकार की निंदा की तथा चेतावनी दी कि सरकार ने नीलामी का कदम नहीं रोका तो आंदोलन किया जाएगा।
किसान कर्जमाफी का वादा निभाए
बीजेपी सांसद डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने प्रदेश की गहलोत सरकार पर किसान कर्जमाफी का वादा करके वादाखिलाफी के आरोप लगाए हैं। साथ ही किसानों की जमीनें औने-पौने दाम पर नीलाम करने और किसानों के आत्महत्या पर उतारू होने की बात भी कही है।
बैंक और रेवेन्यू अधिकारी कर रहे नीलामी
डॉ किरोड़ीलाल मीणा ने आरोप लगाया कि बैंक और रेवेन्यू अधिकारी मिलकर प्रदेशभर में किसानों की जमीनों को औने पौने दामों पर नीलाम कर रहे हैं। जिससे किसान परिवारों पर आर्थिक संकट आ गया है। कई किसान आत्महत्या पर उतारू हो गए हैं। आरोप है कि दौसा में 800 से 1000 किसान, सवाईमाधोपुर में 600 से 700 किसान, करौली में करीब 800 किसान, अलवर जिले में करीब 3000 किसान और धौलपुर-भरतपुर में भी सैकड़ों किसानों की जमीन कुर्क करने के नोटिस चस्पा कर दिए गए हैं। थानागाजी में कल करीब 11 किसानों की जमीन नीलाम कर दी गई। अलवर के रैणी में आज करीब 11 किसानों की जमीन नीलाम की जा रही है। ये सब वो लोन हैं जो सरकारी बैंक और भूमि विकास बैंकों से लिए गए थे। मोटे अनुमान के मुताबिक करीब 15 लाख किसानों का 10 हजार करोड़ रुपए के सहकारी बैंकों के कर्जे की तलवार किसानों पर लटकी हुई है। डॉ किरोड़ी ने कहा कि विधानसभा चुनाव 2018 में जारी कांग्रेस पार्टी ने जन घोषणा पत्र में 10 दिन में किसानों का कृषि लोन माफ करने का वादा किया था।
पीड़ित परिवार को 25 लाख मुआवजे की मांग
डॉ मीणा ने कहा कि उनके ट्वीट के बाद आनन फानन में 19 जनवरी को जमीन नीलामी को रद्द किया गया। जिससे स्पष्ट है कि नीलामी अवैध थी। उन्होंने ऐसे कई उदाहरण देते हुए जन घोषणा पत्र के मुताबिक किसानों के लोन माफ करने, प्रदेशभर में किसानों की जमीनों की नीलामी निरस्त करने, जमीन नीलामी पर तुरंत रोक लगाने, किसान कजोड़ मीना को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले बैंककर्मियों और राजस्व कर्मियों के खिलाफ कार्यवाही करने, कजोड़ मीना का पूरा कर्जा माफ करने, उसके परिवार को 25 लाख रुपए का आर्थिक पैकेज देने की मांग रखी है।



