जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार संयम लोढ़ा ने ब्यूरोक्रेसी पर एक बार फिर सवाल उठा अपनी ही सरकार की कार्यशैली पर प्रश्नचिन्ह लगा डाला। उन्होंने कोरोना पाबंदियों के बावजूद जिला परिषद और पंचायत समिति की स्थायी समितियों के चुनाव कराने पर सवाल उठाए हैं। लोढ़ा ने ट्वीट कर नौकरशाही को आड़े हाथ लिया है। लोढ़ा ने लिखा- क्या कमाल नौकरशाही है.. राजस्थान सरकार के 9 जनवरी के आदेश की पालना में जिला आयोजना समिति के 19 जनवरी के चुनाव स्थगित, जिला परिषदों एवं पंचायत समितियों की स्थायी समितियों के चुनाव रहेंगे यथावत। इस ट्वीट के अलावा लोढ़ा ने मुख्य सचिव से बात करके भी इस पर नाराजगी जताई है। दूसरी तरफ पंचायती राज विभाग ने जिला परिषद और पंचायत समितियों की स्थायी समितियों के चुनाव टालने की मंजूरी देने से इनकार कर दिया।
सिरोही और बूंदी जिलों के जिला परिषद सीईओ ने ओमिक्रॉन का हवाला देते हुए स्थायी समितियों के चुनाव टालने की मंजूरी मांगी थी। ग्रामीण विकास और पंचायतीराज विभाग ने मंगलवार को ही स्थायी समितियों के चुनाव 22 सितंबर 2021 को राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन के हिसाब से करवाने को कहा है। इससे पहले सिरोही कलेक्टर ने 12 जनवरी को ही कोरोना गाइडलाइन का हवाला देकर जिला आयोजना समिति के चुनाव टालने के आदेश जारी किए थे। इसी पर लोढ़ा ने सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि क्या मजाक है? ओमिक्रॉन को देखते हुए सिरोही में जिला आयोजना समिति के चुनाव स्थगित कर दिए। पंचायतीराज विभाग सितंबर 2021 की राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन पर ही चल रहा है। एक ही जिले में सरकार के विभागों में एकरूपता नहीं है। सरकार के काम में एकरूपता तो होनी ही चाहिए। होम डिपार्टमेंट की गाइडलाइन 9 जनवरी की है। ये सितंबर की गाइडलाइन लेकर बैठे हैं।

