नई दिल्ली : आकार में दुनिया की सबसे बड़ी बिल्डिंग बुर्ज खलीफा से भी बड़ा एस्टेरॉयड आज रात करीब 3 बजे पृथ्वी से करीब 19 लाख किलोमीटर दूरी से गुजरेगा, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी का लगभग 5 गुना है। सुनने में भले ही यह दूरी बहुत ज्यादा लगती हो, लेकिन अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक, करीब छह लाख साल बाद पृथ्वी के इतने करीब से कोई इतना बड़ा एस्टेरॉयड गुजर रहा है। आखिरी बार जो एस्टेरॉयड इतना करीब से गुजरा था, उसके कारण पृथ्वी के तापमान में आए बदलाव को ही डाइनासोर्स के खात्मे का जिम्मेदार माना जाता है।
नेशनल एयरोनॉटिकल एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन यानी नासा ने 7482 (1994 PC1) नामक इस एस्टेरॉयड की लंबाई करीब 1 किलोमीटर यानी 3280 फीट बताई है। हालांकि नासा के मुताबिक, इससे धरती को कम खतरा है। लेकिन अगर एस्टेरॉयड अपना रास्ता बदल लेता है तो पृथ्वी के लिए खतरनाक साबित हो सकता है और भारी तबाही मच सकती है। पहली बार साल इस एस्टेरॉयड की खोज साल 1994 में की गई थी।
नासा ने दी जानकारी
नासा ने इस बात की जानकारी ट्विटर के जरिए शेयर की है। नासा ने ट्वीट में लिखा, “बेहत प्रसिद्ध एस्टेरॉयड 1994 PC1 (~1 किमी चौड़ा) आज पृथ्वी के सबसे निकट रहेगा। हमारे #PlanetaryDefense विशेषज्ञों द्वारा दशकों से इसका अध्ययन किया जा रहा है। निश्चिंत रहें, 1994 PC1 मंगलवार 18 जनवरी को हमारे प्लेनेट से 1.2 मिलियन मील दूरी से सुरक्षित रूप से उड़ान भरेगा।
नासा ने ट्वीट में इस एस्टेरॉयड को ट्रैक करने के लिए लिंक भी दिया है। इस ट्वीट के बाद लोगों के अंदर काफी उत्सुकता पैदा हो गई। इसके बाद अधिकांश लोगों ने नासा की वेबसाइट के माध्यम से एस्टेरॉयड को मॉनिटर कर रहे हैं।
एस्टेरॉयड की चमक शुक्र की चमक और आकाश में दिखाई देने वाले अन्य तारों की तुलना में कम है। वेबसाइट के अनुसार, 6 इंच या उससे बड़ा होम टेलीस्कोप एस्टेरॉयड का पता लगाने में मदद कर सकता है, लेकिन कोई बादल या प्रदूषण नहीं होना चाहिए। नासा ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि एस्टेरॉयड से पृथ्वी को कोई खतरा नहीं है।

