जयपुर। समाजवादी नेता डॉ राम मनोहर लोहिया नागरिक स्वतंत्रता के जबरदस्त हिमायती थे। स्वतंत्र चिन्तन, निर्भीकता, मौलिकता और समन्वयवाद उनके व्यक्तित्व की विशेषता थी। गोवा को आज़ादी दिलाने के उनके संघर्ष को सदा याद रखा जायेगा। ये विचार डॉ राम मनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली की ओर से गोवा क्रांति दिवस के अवसर पर गोवा की राजधानी पंजिम के नज़दीक मडगांव के रवींद्र भवन में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विचार मंथन के दूसरे दिन रविवार को विभिन्न विषयों पर सार्थक चर्चा के दौरान संभागियों ने व्यक्त किये।
राष्ट्रीय विचार मंथन के दूसरे दिन प्रथम सत्र में डॉ. लोहिया एवं नागरिक स्वतंत्रता पर हुई चर्चा में समाजवादी चिंतक डॉ सुरेश खैरनार, टी गोपाल सिंह, कुणाल सिंगबाल और अन्वेषा सिंगबाल ने अपने विचार व्यक्त किये। इस सत्र के कम्पेयर हरिकिशन कदम थे। मॉडरेटर की भूमिका में क्ले फेटो कॉन्टिन्हो थे। दूसरे सत्र का विषय गोवा मुक्ति संघर्ष में ईसाईयों का योगदान था। इस सत्र में डॉ सुशीला मेंडेस, सन्देश प्रभु देसाई और एडवोकेट राधाराव ग्रेसिसइ ने अपने विचार रखे । कम्पेयर पूर्वे गुडे और मोडेरेटर विजय कपड़े थे। तीसरे सत्र का विषय लोहिया विज़न था।
इस सत्र में अव्यक्त, बालमेक्स और नारायण देसाई ने भाग लिया। कम्पेयर डॉ तन्वी बाम्बोलकर और मोडेरेटर शैलेन्द्र मेहता थे। अंतिम सत्र में संभागियों ने अपने विचार रखे। डॉ राम मनोहर लोहिया रिसर्च फाउंडेशन, नई दिल्ली के अध्यक्ष अभिषेक रंजन सिंह ने सभी का स्वागत किया और अनंत अग्नि ने धन्यवाद् दिया।
