जयपुर: ACB श्रम विभाग के सचिव और राजस्थान स्किल एंड लिवलिहुड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन (RSLDC) के चेयरमैन नीरज के. पवन IAS को पूछताछ के लिए बुला सकती है। पवन के साथ IAS प्रदीप गवड़े के खिलाफ भी एफआईआर हुई है। उन्हें भी ACB तलब कर सकती है। नीरज के. पवन के खिलाफ तो भ्रष्टाचार से जुड़ा यह चौथा मामला है वे इस मामले में जेल भी जा चुके है। नीरज को कभी भी पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। उनके फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है, इससे उनके घूसकांड में लिप्त रहने से जुड़े कनेक्शन खंगाले जाएंगे। RSLDC घूसकांड से पहले भ्रष्टाचार के तीन तीन मामले होने के बावजूद कांग्रेस और BJP सरकारों के वक्त नीरज के पवन को एक से एक अच्छे पदों पर बैठाया। एक के बाद एक भ्रष्टाचार से जुड़े मामलो में लिप्त होने के बावजूद भी नीरज के. पवन कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही राज में अच्छी मलाईदर पोस्टो पर नियुक्त होते रहे है।
NHM घूसकांड में जेल गए, परिजनों को नौकरी पर रखा
IAS नीरज के. पवन पिछले काफी समय से लगातार विवादों में रहे हैं। 2016 में नीरज के पवन नेशनल हेल्थ मिशन घोटाले में जेल गए थे। स्वास्थ्य विभाग के प्रचार प्रसार से जुड़ी IIC विंग में दलाल के साथ मिलकर चहेती फर्म को गलत तरीके से टेंडर देने के मामले में भी भ्रष्टाचार सामने आया था। इस मामले में ACB ने गिरफ्तार किया था। नीरज के पवन के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग में रहते हुए कॉन्ट्रैक्ट भर्तियों में भारी गड़बड़ियों के 2 केस ACB दर्ज कर चुकी थी। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में बिना योग्यता गलत तरीके से ठेके पर कर्मचारी नियुक्त करने के आरोप में नीरज के पवन के खिलाफ ACB केस दर्ज कर चालान पेश कर चुकी पवन पर पत्नी और निकट रिश्तेदारों और परिचितों तक को संविदा पर मोटे पैकेज में नौकरी पर रखने के दस्तावेज सामने आए। भर्तियों का दूसरा केस नेशनल हेल्थ मिशन में गलत तरीके से जिला सलाहकार और दूसरी भर्तियां की। जिला सलाहकार के पद पर निकट संबंधियों को नियुक्तियां देने और गलत तरीके से लैब टैक्नीशियन लगाने पर केस दर्ज किया। इस केस में अब भी जांच जारी है।
भ्रष्टाचार के केस चल रहे, जहां रहे वहीं शिकायतों का अंबार
NHM घोटाले में जेल में रहने के कारण नीरज के पवन को सरकार ने दो साल सस्पेंड रखा। 17 मई 2016 से 30 अप्रैल 2018 तक करीब दो साल नीरज के पवन सस्पेंड और अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर (APO) रहे। भ्रष्टाचार के आरोप में जेल जा चुके नीरज को जेल से बाहर आते ही सरकार ने प्रशासनिक सुधार विभाग में संयुक्त सचिव लगाया। इसके बाद 15 सितंबर 2018 को भाजपा सरकार ने पवन को कॉपरेटिव रजिस्ट्रार जैसे अहम पद पर लगाया। कॉपरेटिव रजिस्ट्रार रहते समय किए गए कई फैसलों पर सवाल भी उठे, कई शिकायतें भी हुईं, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। कांग्रेस सरकार ने नीरज के पवन को कॉपरेटिव रजिस्ट्रार के पद साथ साथ सूचना जनसंपर्क विभाग के आयुक्त का पद भी दे दिया था। 23 सितंबर 2019 से लेकर 12 फरवरी 2020 तक नीरज सूचना जनसंपर्क विभाग के आयुक्त रहे। बाद में सूचना जनसपंर्क विभाग में भी पवन की कार्यशैली को लेकर सब तरफ से शिकायतें होने लगी थीं। शिकायतों के बाद फरवरी 2020 में यहां से तबादला करके श्रम विभाग के सचिव के पद पर लगा दिया। अब यहां भी केस हो गया है। सूचना जनसंपर्क विभाग के मामले भी खंगाले जा रहे हैं।
