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कमजोर मानसून से सूखे रह गए बांध, अकाल के हालात

जयपुर : राजस्थान में पानी का संकट गहराता जा रहा है। प्रदेश के अधिकतर बांध सूख चुके हैं और जहां पानी है भी, वहां बेहद कम मात्रा में ही पानी बचा है। राज्य में 60 फीसदी बांध ऐसे हैं, जहां एक बूंद भी पानी नहीं है। वहीं, राजस्थान में उन बांधों की स्थिति भी ठीक नहीं, जिनसे अधिकतकर आबादी पानी पीती है। बंगाल की खाड़ी में बने लो प्रेशर एरिया का असर कम होने के बाद आज से राजस्थान में मानसून फिर से कमजोर पड़ने लग गया। राखी के दिन प्रदेश के पूर्वी हिस्से के साथ-साथ पश्चिमी हिस्सों में हुई बारिश से भले ही लोगों को राहत मिली।

मौसम विभाग के मुताबिक अगले 5 दिन तक प्रदेश में बारिश के कोई आसार नहीं है। मौसम साफ रहेगा और तापमान भी बढ़ेगा। जिससे गर्मी फिर से लौटकर आएगी। वहीं, पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर, गंगानगर, जोधपुर, बाड़मेर, जालौर और सिरोही इलाकों में बारिश नहीं होने से सूखे जैसे हालात बन गए है।

जुलाई के आखिरी सप्ताह से अगस्त के पहले सप्ताह तक पूर्वी राजस्थान में हुई तेज बारिश के बाद से मौसम सुस्त पड़ गया। 12 अगस्त तक जहां प्रदेश में औसत बारिश 8 फीसदी ज्यादा थी, लेकिन पिछले दिनों सुस्त पड़े मानसून के कारण यह आंकड़ा घटकर अब माइनस 6 फीसदी हो गया। प्रदेश के कुल 727 बांध में से 60 फीसदी बांध यानि 435 बांध ऐसे हैं, जहां एक बूंद भी पानी नहीं है। बड़ी बात यह है कि पेयजल सप्लाई के नजरिए से अहम 6 बांध में पानी बहुत कम हो गया है।

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बीसलपुर बांध पर ही 90 लाख आबादी निर्भर

राजस्थान की करीब 1 करोड़ आबादी का पेयजल जिन बांधों से मिलता है, उनमें अभी तक करीब 30% पानी ही आया है जबकि आधा मानसून गुजर चुका है। अकेले बीसलपुर बांध पर ही 90 लाख आबादी निर्भर है। इसमें अब तक सिर्फ 34.10% पानी आया है। इसके अलावा अन्य छोटे-बड़े बांध भी पूरे साल लगभग 20 से 30 लाख लोगों की प्यास बुझाते हैं लेकिन चिंता की बात ये है कि इनमें भी औसत से कम पानी आया है। ऐसे में जलदाय विभाग की चिंताएं बढ़ गई हैं अब 10 सितंबर तक बारिश का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद सर्दियों के लिए भी कंटेजेंसी प्लान बनाना होगा।

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पश्चिमी राजस्थान के किसानों की चिंता बढ़ी

पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने से इन क्षेत्र के जिलों के किसानों की चिंता बढ़ गई है। बीकानेर, गंगानगर, जोधपुर क्षेत्र में मूंगफली, मूंग, मोठ, ग्वार, बाजरा, नरमा, तिल की बुवाई पहले से ही कम थी और बारिश नहीं होने से इन फसलों के खराब होने की आशंका बढ़ गई है। बीकानेर क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण वहां कई गांवों में फसलें जलने की कगार पर पहुंच गई है। यहीं स्थिति जालौर, सिरोही और जोधपुर क्षेत्र की बनी हुई है।

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