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शिक्षा क्षेत्र में हो रहे वर्तमान परिदृश्य में बदलाव को लेकर परिचर्चा आयोजित

श्रीगंगानगर: श्रीगंगानगर प्रांगण में शिक्षा के क्षेत्र में वर्तमान परिदृश्य में हो रहे विभिन्न प्रकार के बदलावों व आयामों पर एक चर्चा का आयोजन किया गया। इस चर्चा में शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षण संस्थाओं की भूमिका, विद्यार्थियों की विभिन्न समस्याओं व शिक्षण संस्थानों में कार्यरत शिक्षकों के भविष्य जैसे कई पहलुओं पर गहनता से मंथन किया गया।

भारत में शिक्षा का बजट 3% जबकि चीन का 7%

स्वागत उद्बोधन में प्रवक्ता अनूप स्वामी चर्चा में पधारे सभी प्रबुद्ध जनों, जनप्रतिनिधियों व् शिक्षण संस्थान संचालकों को धन्यवाद प्रेषित किया । अध्यक्षता कर रहे पी. सूदन ने शिक्षा के विभिन्न पहलूओं पर अपने विचार साझा किये। उन्होंने कहा की भारत में शिक्षा का बजट 3% है जबकि चीन का शिक्षा बजट 7% है। निजी शिक्षण संस्थानों को किसी प्रकार की कोई सरकारी अनुदान भी नहीं है। इन संस्थाओं के प्रबंधन हेतु शिक्षण शुल्क ही विकल्प है। शिक्षण शुल्क तय व नियमित समय पर ही लिया जाना चाहिए। शिक्षण शुल्क के नाम पर यदि किसी असामाजिक तत्व द्वारा राजनीति की जाती है तो यह एक चिंता की विषय है इस समय रहते अंकुश लगाना जरूरी है।

इसकी क्रम में चर्चा में पधारे पवन अरोडा ने कहा की शिक्षण शुल्क कम करवाने के नाम पर मानवता व् नैतिकता के मूल्यों का हनन हो रहा है। विद्यालय व् महाविद्यालय की अपनी एक आधारभूत संरचना होती है जिसका प्रबंधन भी संस्थान द्वारा किया जाता है। महामारी के इस दौर में जबकि कई शिक्षण संस्थानों की 10% शुल्क भी कोष में नहीं आई है जिससे यह प्रबंधन दिन-प्रतिदिन मुस्किल होता जा रहा है।

राज्य सरकार निजी शिक्षण संस्थानों के हित में ठोस कदम उठाये 

करनपुर से पधारे विक्रम कम्बोज ने अपने विचार रखते हुए कहा कि राज्य सरकार निजी शिक्षण संस्थानों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठती हैं। यदि संस्थान द्वारा शुल्क में कोई कटौती की जाती है तो उस पर किसी प्रकार का कोई अनुदान नहीं है और यदि शिक्षण संस्थानों द्वारा विद्यार्थिओं की अनैतिक मांगो को न मानते हुए शुल्क कटोती नहीं की जाती तो विद्यार्थी धरना प्रदर्शन करने, कार्मिकों को धमकाने जैसे हथकण्डे अपनाने लग जाते है। प्रसाशन को जिला स्तर पर इस विषय पर कोई ठोस कदम उठाना ही पड़ेगा।

कार्यक्रम में पधारे मनिंदर मान ने कहा कि शिक्षण शुल्क प्रस्तावित होता है को की विद्यार्थी द्वारा देय है इसमें किसी छुट का प्रावधान राज्य सरकार, विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित होती है जो की शिक्षण संस्थानों द्वारा समय-समय पर कर दी जाती है परन्तु शिक्षण शुल्क के नाम पर राजनीति करना, अराजकता फैलाना बहुत गलत है। यह एक गंभीर विषय है जिस पर अंकुश जरूरी है।

राजेंद्र ने चर्चा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि शिक्षण संस्थाओं को एकजुट होना होगा ताकि शुल्क माफ़ी के नाम पर हो रही गुंडागर्दी को रोका जा सके। शिक्षण संस्थानों के प्रबन्ध खर्च में कटोती नहीं की जा सकती और न ही शिक्षकों की। चर्चा में पहुचे प्रबुद्ध जनों द्वारा या भी कहा गया कि जब विद्यार्थी के पास तरह-तरह के दुपहिया, चोपहिया वाहन है, वर्तमान युग के मोबाइल फोन है तो अभिभावक शिक्षण शुल्क देते समय महामारियों के प्रकोप को क्यू आधार बनाते है। विद्यार्थी जीवन में इन संसाधनों का नहीं अपितु शिक्षा का महत्त्व है।

कोरोना प्रकोप के कारण शिक्षा का स्तर गिरा

सभा के अंत में सरस्वती शिक्षण सदन के प्रबन्ध निदेशक बलराज जाखड़ ने अपने विचार रखते हुए कहा कि कोई भी शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों का अहित नहीं चाहता। हम सबका यही ध्येय है कि शिक्षण संस्थान में आने वाला प्रत्येक विद्यार्थी उच्चतर शिक्षा प्राप्त कर एक अच्छा मुकाम हासिल करे। कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण शिक्षा का स्तर गिरा है। कमाई के संसाधन भी कम हुए है। इस सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए शिक्षण शुल्क में जरूरतमन्द को रियायत भी दी गयी है परन्तु इसके बावजूद कुछ असामाजिक तत्व जो की शिक्षण संस्थानो की छवि धूमिल कर अपनी राजनीति चमकाना चाहते है वो कतई बर्दास्त योग्य नहीं है क्योंकि जो आज एक के साथ हो रहा हो तो कल सबके साथ होगा। प्रशासन को इस प्रकार के माफिया के विरूद्ध क़ानूनी कार्यवाही करनी पड़ेगी अन्यथा शिक्षण संस्थानों का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा।

इस चर्चा में श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले के प्रबुद्धजनों, स्कुल शिक्षा व् महाविद्यालय शिक्षा से जुड़े संचालक, समाजसेवी व् जन प्रतिनिधियों जैसे: पी.एस सूदन , राजेंद्र राठी, मनिंदर मान, डॉ पवन अरोडा, बॉबी पहलवान, पवन कटारिया, राजीव खेतान, बलवीर सिहाग, विनोद राठोड़, अनील धानुका, अजय गुप्ता, हेमंत गुप्ता, शेरलखविन्द्र सिंह व् जनप्रतिनिधि संजय यादव (सरपंच 6 एल एन पी), श्री बृजमोहन यादव (ख्यालीवाला), श्री सन्दीप नाथ (सरपंच, 2 एम् एल) आदि ने शिरकत की। समापन समारोह में सरस्वती शिक्षण सदन के निदेशक डॉ. उम्मेद सिंह शेखावत ने चर्चा में पधारे सभी प्रबुद्धजनों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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