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लालित्य ललित में वृहद और विशाल साहित्य लिखने की अपार सम्भावना : प्रताप सहगल

लालित्य ललित में वृहद और विशाल साहित्य लिखने की अपार सम्भावना : प्रताप सहगल

जयपुर। 21वीं सदी के साहित्यकार समूह के विशेष आयोजन के अंतर्गत आज ‘अनुस्वार पत्रिका- एक बेहतरीन शुरुआत’ शीर्षकीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। इस वेबिनार में देश के अलग अलग राज्यों के विशिष्ट साहित्यकारों की भागीदारी रही।

कार्यक्रम के अध्यक्ष और प्रसिद्ध नाटक साहित्यकार प्रताप सहगल के अनुसार – साहित्य का मूल्यांकन करने के लिए भारतीय और पाश्चात्य निकषों की आवश्यकता पड़ती है। अब भी नई-नई साहित्यिक जानकारियों को पढ़ने की आवश्यकता है। ललित ने बच्चों के लिए साहित्य, व्यंग्य और कविता में स्वयं को सिद्ध किया है। उन्हें अन्य विधाओं में भी हाथ आजमाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ललित में वृहद और विशाल साहित्य लिखने की क्षमता है। डॉ.सहगल ने यह भी कहा कि संजीव कुमार इस विषय में नए-नए प्रयोग कर रहे हैं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, अनुस्वार के अतिथि संपादक और व्यंग्य यात्रा के यशस्वी संपादक व्यंग्य पुरोधा प्रेम जनमेजय ने कहा – “पत्रिका निकालना एक चुनौतीभरा काम है। पत्रिका की प्रसवपीड़ा असह्य होती है। उसे मंच देना, उसका प्रचार-प्रसार करना और दायित्व निभाना बहुत बड़ी चुनौती है।

कई पत्रिकाएँ निकालने को तो निकाली जाती हैं, लेकिन समर्पण भावना की कमी के चलते पनप नहीं पातीं। ऐसे कई लोगों के अनुभवों को मैंने करीब से देखा है। जब तक आप यह तय नहीं करते कि पत्रिका क्यों पढ़ी जाए तब तक पत्रिका निकालने का कोई अर्थ नहीं है। लालित्य ललित आज के समय के महत्वपूर्ण साहित्यकार हैं। इंडिया नेटबुक्स के सौजन्य से ललित की कई पुस्तकें आ चुकी हैं, इसलिए उन पर केंद्रित अनुस्वार अंक न्यायोचित है।”

Immense potential for writing large and vast literature in Lalitya Lalit: Pratap Sehgal

लालित्य ललित ने अपनी बात रखते हुए कहा कि प्रेम जनमेजय, ज्ञान चतुर्वेदी, हरीश नवल जैसे दिग्गज साहित्यकारों ने मुझमें कविता के अतिरिक्त व्यंग्य की प्रबल संभावना देखी। उन्हीं के मार्गदर्शन पर चलते हुए मैं आगे बढ़ने का प्रयास करता हूँ। प्रेम जी मेरी कविता में व्यंग्य के कंबो देखते हैं। मैं भवानी प्रसाद मिश्र से अत्यंत प्रेरित हूँ। मैं डॉ. संजीव कुमार और प्रेम जनमेजय जी का कृतज्ञ हूँ कि उन्होंने मुझे अंक का केंद्र मानकर जो सौभाग्य दिया है, उसके लिए ऋणी हूँ।

अनुस्वार के प्रकाशक, इंडिय़ा नेटबुक्स के स्वामी तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ संजीव कुमार ने कहा – ” नए स्वर को मंच देने के उद्देश्य से अनुस्वार पत्रिका का आरंभ किया गया। प्रेम जनमेजय जी वास्तविक रूप से ऐसे मार्गदर्शक हैं, जिनकी संपादन, लेखन व आलोचकीय दैवीय क्षमता से हम अभिभूत हैं। यह पत्रिका नवलेखकों को मंच देने के उद्देश्य से आरंभ की गई है। किसी भी पत्रिका का पहला अंक हमेशा चुनौती भरा होता है। कोई भी रचनाकार चंद्रधर शर्मा गुलेरी नहीं होता।

नवोदित रचनाकार, नवोदित ही होता है। भविष्य में इस पत्रिका को और अधिक समृद्ध करने का प्रयास किया जाएगा। वैसे इंडिया नेटबुक्स अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप बनाने में सफल हो रहा है। अगला अंक वरिष्ठ साहित्यकार प्रताप सहगल जी पर केंद्रित होगा। अतिथि संपादन पुनः प्रेम जनमेजय जी करेंगे। इस अवसर पर डॉ संजीव ने कहा कि बहुत जल्द इंडिया नेटबुक्स साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए पुरस्कार देने का चलन आरंभ करेगा।”

विशेष वक्ताओं में चेन्नई से वरिष्ठ व्यंग्यकार बी.एल.आच्छा जी के अनुसार – “अनुस्वार पत्रिका के साथ डॉ. संजीव कुमार ने साहित्य का आगाज किया है। प्रेम जनमेजय के अतिथि संपादन में इस पत्रिका ने अपने पहले ही अंक में क्रांतिकारी शुरुआत की है। ललित जी का चयन सबसे उपयुक्त है।

कुल्लू के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ सूरत ठाकुर के अनुसार, “अनुस्वार पत्रिका बहुत अच्छी पहल है। उज्जैन के लोकप्रिय व्यंग्यकार हरीश कुमार सिंह के अनुसार – “लालित्य ललित सर्वाधिक महत्वपूर्ण रचनाकार हैं। यह पत्रिका साहित्य का दर्पण हैं।

प्रभात गोस्वामी, जयपुर के अनुसार – “किशोरावस्था में नंदन, युवावास्था में कादंबिनी, धर्मयुग पढ़कर साहित्य का लुत्फ उठाया है,लेकिन जैसे-जैसे बड़े प्रकाशक अपने प्रकाशन बंद करने लगे या नियमितता के चलते कुछ पत्रिकाएँ अपनी चमक खो बैठी हैं। प्रेम जनमेजय जी की व्यंग्य यात्रा पत्रिका नियमित पत्रिकाएँ नवीन पत्रिकाओं के लिए प्रेरणास्रोत बना है।

आजकल पत्रिकाओं का अकाल चल रहा है। ऐसे में डॉ. संजीव कुमार ने अनुस्वार पत्रिका को चुनौती के रूप में लेकर एक साहसिक कार्य किया है। ललित जी पर केंद्रित अनुस्वार का प्रथम अंक नवयुवा रचनाकारों के लिए प्रेरणास्रोत है। वरिष्ठ साहित्यकारों पर केंद्रित यह अंक सबके लिए प्रेरणास्पद है।”

फारूख अफरीदी, राजस्थान मुख्यमंत्री के विशेष अधिकारी के अनुसार – “अनुस्वार पत्रिका एक धमाका है। भारत में आए दिन पत्रिकाएँ बंद होती जा रही हैं। ऐसे में यह अनुस्वार पत्रिका एक क्रांतिकारी पहल है। डॉ. संजीव कुमार जी ने अपना जीवन साहित्य को समर्पित कर दिया है। उन्होंने देशभर के लेखकों को जोड़ने वाले सेतु के रूप में काम किया है। लालित्य ललित का बहुपक्षी रंग प्रेम जनमेजय अच्छी तरह से जानते हैं। इसलिए उनका अतिथि संपादन श्रेष्ठ है। लालित्य ललित लेखन के प्रति समर्पित हैं। वे अपनी कर्मठता के बल पर रचनाधर्मिता की उपासना करते हैं। ललित जी देश और दुनिया को जोड़ने की अपार क्षमता रखते हैं। ललित जी पर केंद्रित यह अंक शानदार है।”

सुनीता शानू के अनुसार – “ललित जी पर केंद्रित अनुस्वार पत्रिका बहुत बढ़िया है। यदि एक-एक लेखक दस-दस प्रतियाँ भी लेता है और उन्हें पाठकों तक पहुँचाते हैं, तो इस पत्रिका के बारे में बहुत सी अच्छाइयाँ पता चलेंगी।

रांची से दिलीप तेतरबे जी के अनुसार – “ललित जी की कलम कलम नहीं है, वीडियो कैमरा है। वे साहित्यिक उत्पादन के चैंपियन हैं।

कार्यक्रम का सफल संचालन युवा और सक्रिय साहित्यकार रणविजय राव ने किया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत तेलंगाना सरकार के हिंदी अकादमी सम्मान से सम्मानित युवा रचनाकार डॉ. सुरेश कुमार मिश्रा ने किया। धन्यवाद ज्ञापन सक्रिय रचनाकार विवेकरंजन ने किया।

कार्यक्रम में 21वीं सदी साहित्यकार मंच से राजेश कुमार, परवेश जैन और सुषमा व्यास ने अपनी उपस्थिति से गरिमा बढ़ाई।

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