टोंक: मालपुरा तहसील सोडा गांव के निवासी महावीर चक्र से सम्मानित बिग्रेडियर रघुवीर सिंह का 98 साल की उम्र में निधन हो गया। सोडा ग्राम में 2 नवम्बर 1923 को प्रताप सिंह के घर जन्मे रघुवीर अपनी बहादुरी के चलते महावीर चक्र सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित हो चुके है।
बिग्रेडियर रघुवीर सिंह के निधन पर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी ट्वीट कर शोक व्यक्त किया और कहा कि राजस्थान के महावीर चक्र पुरस्कार विजेता ब्रिगेडियर रघुवीर सिंह (सेवानिवृत्त) के निधन पर मेरी गहरी संवेदना है। 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनकी अनुकरणीय बहादुरी को हमेशा याद किया जाएगा। ईश्वर उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे और दिवंगत आत्मा को शांति दे।
My deepest condolences on demise of Tonk, Rajasthan’s, Maha Vir Chakra awardee, Brigadier Raghuveer Singh (retd). His exemplary bravery during the Indo-Pak war of 1965 shall always be remembered. May God give strength to his family to bear this loss and may the departed soul RIP.
— Ashok Gehlot (@ashokgehlot51) June 13, 2021
मुख्यंमत्री के आलावा पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट,बीजेपी अध्यक्ष सतीश पूनियां, राजेंद्र राठौड़ और कई राजनेताओं ने शोक व्यक्त किया है।
भारतीय सेना में ब्रिगेडियर रहे, सोडा (टोंक) निवासी महावीर चक्र से सम्मानित श्री रघुवीर सिंह राजावत जी के निधन पर गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। 1965 के भारत-पाक युद्ध में आपके द्वारा दिए गए योगदान को सदैव याद किया जाएगा। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति व परिजनों को संबल प्रदान करें।
— Sachin Pilot (@SachinPilot) June 13, 2021
भारत -पाक युद्ध के हीरो
रघुवीर सिंह राजावत 22 मार्च 1942 को सेना मे भर्ती हुए थे। उन्होेंने सेना के कई ट्रेनिंग कोर्स एवं सिविल कोर्स भी किए।बिग्रेडियर रघुवीर सिंह ने 1943 से 1974 तक द्वितीय विश्व युद्ध में भाग लेकर क्षेत्र का मान बढाया। 1965 के भारत पाक युद्ध के दौरान पंजाब के खेमकरन-लाहौर सैक्टर में असल उतर की लडाई में राजपूताना राइफल्स की एक बटालिन के कमाण्डर के रूप में लेफ्टिनेन्ट कर्नल रघुवीर सिंह ने टैंकों के बीच गोलों की बौछार झेलते हुए दुश्मन के सशस्त्र डिवीजन पर निर्णायक हमला किया और युद्ध भूमि को 20 पैटन टेंकों का क्रबिस्तान बना दिया था।
उनकी इस बहादुरी और साहसपूर्ण नेतत्व के लिए 7 सितम्बर 1965 को राष्ट्रपति द्वारा गैलण्ट्री अवार्ड के रूप में उनको महावीर चक्र से सम्मानित किया गया। अनेक राष्ट्रपति पुरस्कारों, मैड़लों और प्रशस्ति पत्रों से सम्मानित बिग्रेडियर रघुवीर सिंह ने 1971 मे बांग्लादेश युद्ध के एक लाख बन्दियोें के निगरानी केंम्पों की देख रेख का उत्तरदायित्व भी बड़ी कुशलता से संभाला था।
ब्रिग्रेडियर रघुवीर सिंह के दो पुत्र मेजर संग्राम सिंह एवं नरेन्द्र सिंह है। ब्रिग्रेडियर रघुवीर सिंह की पोती एवं नरेन्द सिंह की पुत्री छवि राजावत ने भी सोडा ग्राम की दो बार सरंपच बनकर अपनी सेवाएं ग्रामवासियों को दीे। सरपंच बनकर छवि राजावत को भी अनेक बार अपनी प्रशंसनीय सेवा कार्यों के लिए सम्मानित किया जा चुका है।
Read More: मुझसे किसी ने इस्तीफा नहीं मांगा, पंजाब मसले में भी मेरा कोई लेना-देना नहीं: हरीश चौधरी
