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International Nurses Day : आज के दिन हुआ था ‘लेडी विद द लैंप’ फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म

International Nurses Day

जयपुर। कोरोनाकाल में पिछले एक वर्ष से अधिक समय से हम देख रहे हैं कि नर्स मरीजों को ठीक करने में अपना दिन-रात एक कर रही हैं। यदि दुनिया में नर्सिंग का पेशा न होता तो आज इस महामारी में हम सभी का जीवन और भी संकट में होता। आज नर्से कई सारी जानों को बचा रही हैं, कई सारे लोगों के लिए उम्मीद की किरण हैं। भारत में नर्सों को सिस्टर का भी संबोधन दिया जाता है। आज इंटरनेशनल नर्स डे (International Nurses Day ) है। इस दिन को फ्लोरेंस नाइटिंगेल के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। नर्सिंग को एक सम्मानजनक पेशा बनाने का श्रेय फ्लोरेंस नाइटिंगेल को ही जाता है।

अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग दिवस का इतिहास

12 मई 1820 को इटली के फ्लोरेंस में नाइटिंगेल का जन्म हुआ था। उच्च वर्गीय परिवार में जन्मीं फ्लोरेंस के घर वालों को ये बिल्कुल मंजूर नहीं था कि उनकी बेटी नर्स बने, क्योंकि उस वक्त नर्सिंग को सम्मानित पेशा नहीं माना जाता था। आखिरकार फ्लोरेंस की जिद के आगे घर वालों को झुकना पड़ा और फ्लोरेंस को नर्सिंग की ट्रेनिंग के लिए जर्मनी जाने की इजाजत मिल गई। साल 1851 में वे जर्मनी गईं और 1853 में उन्होंने लंदन में महिलाओं के लिए अस्पताल खोला। इसी साल क्रीमिया का युद्ध शुरू हो गया। फ्लोरेंस 38 नर्सों को साथ लेकर तुर्की के एक मिलिट्री अस्पताल में सैनिकों की सेवा करने गईं।

जनवरी 1974 में की गई घोषणा

अस्पताल में फ्लोरेंस ने गंदगी का पहाड़ देखा। उन्होंने सबसे पहले अपना ध्यान साफ-सफाई पर लगाया। उन्होंने घायल और बीमार सैनिकों की देखभाल में दिन-रात एक कर दिया। वे रात में भी सैनिकों की सेवा में लगी रहती थीं। इस दौरान हाथ में लालटेन लेकर वह मरीजों को देखने जाती थीं, इसी कारण सैनिक उन्हें ‘लेडी विद द लैंप’ कहने लगे। जब फ्लोरेंस युद्ध के बाद लौटीं, तो उनका यह नाम प्रसिद्ध हो गया था। आज भी पूरी दुनिया उन्हें इसी नाम से जानती है। जनवरी 1974 में, इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स द्वारा अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस (International Nurses Day) मनाने की घोषणा की गई। इस दौरान इंटरनेशनल काउंसिल ऑफ नर्स द्वारा नर्सों को किट भी बांटी जाती है। इसमें उनके काम आने वाली सामग्री होती है।

अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस 2021 का विषय

प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के लिए एक विषय तय किया जाता है। इस वर्ष का विषय ‘नेतृत्व के लिए एक आवाज: भविष्य के स्वास्थ्य के लिए दृष्टि’ रखा गया है। इस विषय के आधार भविष्य में नर्सों का स्वास्थ्य सेवा में महत्व और नेतृत्व को लेकर काम किया जाएगा। कई सारे अस्पतालों में इस विषय पर चर्चाओं का आयोजन भी किया जा रहा है।

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