Headlines

आदर्श दिनचर्या से मनचाही संतान प्राप्त कर सकती है मां: डॉ. सरोज गुप्ता

जयपुर। अखिल विश्व गायत्री परिवार, शांतिकुंज हरिद्वार के आओ गढ़े संस्कारवान पीढ़ी अभियान के अंतर्गत गायत्री परिवार राजस्थान की ओर से गर्भवती महिलाओं के लिए नौ दिवसीय दिव्य गर्भोत्सव निशुल्क कार्यशाला में दूसरे दिन डॉ. सरोज गुप्ता ने गर्भवती माता की आदर्श जीवनचर्या एवं उसका गर्भस्थ शिशु पर प्रभाव पर प्रोजेक्टर के माध्यम से सारगर्भित जानकारी दी। प्रांरभ में दुर्गापुरा स्थित गायत्री चेतना केन्द्र से उप जोन समन्वयक सुशील शर्मा ने गायत्री मंत्र के साथ कार्यशाला शुरू की। कार्यशाला 3 जून तक चलेगी। इसमें पूरे राजस्थान से सैंकड़ों महिलाएं शामिल हो रही है।

कार्यशाला के दूसरे दिन मुख्य वक्ता डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि मां अगर चाहे तो मनचाही संतान प्राप्त कर सकती है। वह अपनी कोख से राम, भरत, विवेकानंद, शिवाजी जैसी संतान जन्म दे सकती है। मां कुम्हार की तरह कच्ची मिट्टी जैसे गर्भस्थ शिशु को मनचाहा आकार दे सकती है। वह संतान निर्मात्री है। लेकिन इसके लिए उन्हें आदर्श दिनचर्या का पालन करना होगा। मां के शरीर, मन, आत्मा और व्यक्तित्व से तदनुरूप बच्चे का निर्माण होता है। इसलिए मां जैसे गुण अपने भावी संतान में देखना चाहती है वैसे गुण स्वयं में विकसित करने होंगे। गर्भकाल में क्रोध, ईष्र्या जैसे नकारात्मक दुर्गुणों से दूर रहे, क्योंकि क्रोध करने से शरीर में घातक हार्मोंस स्त्रावित होते हैं जो गर्भस्थ शिशु की नसों में विष की तरह पनपकर बीमार कर देते हैं।

sangeet

ऐसी हो गर्भवती की आदर्श दिनचर्या

डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि गर्भस्थ शिशु मां को बहुत पसंद करता है। वह उनकी प्रत्येक गतिविधि में शामिल होता है। इसलिए ब्रह्म मुहूर्त में उठें, भगवान को धन्यवाद देने के लिए कोई प्रार्थना करें। संगीतमय जागरण गीत सुने। इसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु के अचेतन मन पर पड़ता है। इसके बाद आत्म बोध साधना करें। सहनशीलता, धैर्य जैसे गुण बच्चे विकसित करने की भावना के साथ धरती माता को प्रणाम करें। रात को तांबे के पात्र में रखा पानी बिना कुल्ला-ब्रश किए उकडू़ बैठकर घूंट घूंट पीए। बच्चे का स्नायु तंत्र विकसित हो इसके लिए ध्यान करें। स्नान कर यज्ञ- आरती भी करें। इस दौरान भगवान के दैवीय गुण बच्चे में आएं, ऐसी प्रार्थना और भाव करें।

bojan

संतुलित भोजन से दे पूरा पौषण

डॉ. सरोज गुप्ता ने कहा कि नाश्ता, दोपहर और रात का भोजन पौष्टिक और विविधता वाला होना चाहिए। नाश्ते में फल, अकुंरित अनाज, दूध, दलिया लें। शाम को फल, सूप लें। शाम को हल्का भोजन करें। भोजन बनाते समय मधुर संगीत बजाए और खुद गुनगुनाएं। इससे गर्भस्थ शिशु का मस्ष्कि का विकास अत्यधिक गति से होगा। दोपहर के में ध्यान करें। इसके बाद 45 मिनट नींद लें। उठने बाद बौद्धिक खेल खेलें, पैटिंग, गार्डनिंग, सिलाई, पेटिंग जैसे शोक में समय व्यतीत करें। इससे बच्चे का आई क्यू लेवल बढ़ता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *